क्वेटा, 12 जनवरी (khabarwala24)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जारी तनाव के बीच पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। बलूचिस्तान में विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से शिक्षकों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने कॉलेजों के अलग-अलग डिपार्टमेंट की छह महिला टीचरों समेत 38 असिस्टेंट प्रोफेसर और लेक्चरर को तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है।
बलूचिस्तान के महासचिव की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, यह कार्रवाई बलूचिस्तान एम्प्लॉइज एफिशिएंसी एंड डिसिप्लिन एक्ट (बीईडीए) के तहत हड़ताल में हिस्सा लेने, सरकारी दफ्तर में ताला लगाने और सरकारी काम में रुकावट डालने के लिए की गई। सस्पेंड किए गए टीचरों पर सरकारी नियम तोड़ने का आरोप है।
अधिकारियों के हवाले से द बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया कि सस्पेंड किए गए लोगों में बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस के चेयरमैन अब्दुल कुदूस काकर भी शामिल हैं। यह सरकारी कर्मचारियों का एक गठबंधन है, जो कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी कई मांगों को लेकर कई दिनों से विरोध आंदोलन चला रहा है।
हालांकि, सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना हुई है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस कदम पर चिंता जताई और सस्पेंशन को विरोध करने के अधिकार को दबाने की कोशिश बताया। इसके अलावा, कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि टीचरों के खिलाफ सजा देने वाले कदमों से सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच तनाव और बढ़ेगा।
इस बीच, बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए इसे न्याय मांगने वाली आवाजों को दबाने के लंबे समय से चले आ रहे पैटर्न का हिस्सा बताया।
बीएसएसी संगठन ने कहा, “बलूचिस्तान का इतिहास गवाह है कि जब भी सच और न्याय के लिए आवाज उठाई गई है, उस समय की सरकार ने उसे ताकत और बदले की भावना से दबाने की कोशिश की है। बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस की सही मांगों पर दमन और हिंसा के जरिए जवाब देना बहुत शर्मनाक और तानाशाही है।”
बीएसएसी के प्रवक्ता के अनुसार, महिला टीचरों सहित प्रोफेसरों और लेक्चरर का सस्पेंशन और गठबंधन के नेताओं की गिरफ्तारी, एक ऐसी सरकार को दिखाती है जो ज्ञान और कलम से डरती है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के शिक्षा में सुधार के दावे के बावजूद, यह टीचरों को सस्पेंड और गिरफ्तार करती है। यह साबित करता है कि असल में शिक्षा और लोगों की भलाई इसकी प्राथमिकताएं नहीं हैं।
इसके साथ ही संगठन ने बलूचिस्तान सरकार से जिद और ताकत का इस्तेमाल छोड़ने और विरोध कर रहे कर्मचारियों के साथ शांतिपूर्ण बातचीत करने की अपील की।
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