नई दिल्ली, 27 जनवरी (khabarwala24)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को साझा मूल्यों और सिद्धांतों के आधार पर भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इन मूल्यों में लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद, कानून का शासन और संयुक्त राष्ट्र के मूल में आधारित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शामिल हैं।
नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए नेताओं ने सुरक्षा खतरों से निपटने, समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलापन और सुरक्षा को मजबूत करने, जलवायु व जैव विविधता संरक्षण पर कार्रवाई तेज करने तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में प्रगति को गति देने पर सहमति जताई। विस्तृत चर्चाओं के बाद जारी संयुक्त बयान में इन बिंदुओं का उल्लेख किया गया।
एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत की 77वीं गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजकीय यात्रा पर हैं। उनके साथ विदेश और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कालास और व्यापार आयुक्त मारोस शेफचोविच समेत उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि नेताओं ने भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह दोनों पक्षों के बीच अपनी तरह का पहला व्यापक रक्षा और सुरक्षा ढांचा है, जो समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी, साइबर और हाइब्रिड खतरों, अंतरिक्ष और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और गहरा करेगा। साथ ही, सूचना सुरक्षा समझौते पर वार्ता शुरू होने का भी स्वागत किया गया, जिससे गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुविधा मिलेगी और सुरक्षा व रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूती मिलेगी।
नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता रेखांकित की, ताकि वह अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी, पारदर्शी, प्रभावी, लोकतांत्रिक और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बन सके।
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर करीबी सहयोग के महत्व को स्वीकार किया और कहा कि यूरोप तथा इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और समृद्धि आपस में जुड़ी हुई है।
दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस के अनुरूप स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने नई दिल्ली में होने वाली भारत-ईयू इंडो-पैसिफिक परामर्श बैठक के पहले संस्करण समेत क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का स्वागत किया और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) तथा भारतीय महासागर रिम संघ (आईओआरए) के तहत सहयोग मजबूत करने की बात कही।
यूक्रेन के मुद्दे पर दोनों पक्षों ने जारी युद्ध पर चिंता जताई और कहा कि यह संघर्ष व्यापक मानवीय पीड़ा का कारण बन रहा है तथा इसके वैश्विक प्रभाव हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रयासों का समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
ईरान और क्षेत्र की हालिया चिंताजनक घटनाओं पर भी चर्चा हुई, जिसमें समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर बल दिया गया।
गाजा संघर्ष के संदर्भ में नेताओं ने 17 नवंबर 2025 को पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का उल्लेख किया, जिसमें शांति बोर्ड की स्थापना और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को अधिकृत करने का स्वागत किया गया है। उन्होंने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित यूएन प्रस्तावों के अनुरूप इस प्रस्ताव को पूरी तरह लागू करने का आह्वान किया, निर्बाध मानवीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया और दो-राष्ट्र समाधान के आधार पर न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की वकालत की।
संयुक्त बयान में नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की सभी रूपों में “स्पष्ट और कठोर” निंदा की, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है। उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। साथ ही कट्टरपंथ, आतंकवादी वित्तपोषण, धन शोधन, नई और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग और आतंकवादी भर्ती को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की।
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