वॉशिंगटन, 11 जनवरी (khabarwala24)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में हिंदू प्रवासी समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सलाहकारों से खास बांग्लादेश में हालात को लेकर अपील की है। हिंदू प्रवासियों ने भारत सरकार से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर तुरंत एक्शन लेने की अपील की है। उन्होंने हत्याओं, भीड़ के हमलों और कथित तौर पर सरकार की तरफ से कोई एक्शन न लेने का हवाला दिया है।
पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में, वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने कहा कि वे यह अपील बहुत दुख और जल्दबाजी के साथ कर रहे हैं। यह अपील समूहों ने एक युवा बांग्लादेशी हिंदू, दीपू चंद्र दास, की लिंचिंग और जिंदा जलाने और इसी तरह के कई हमलों के बाद की है।
चिट्ठी में कहा गया, “अगस्त 2025 से, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा तेजी से बढ़ी। दिसंबर 2025 के मध्य से फैलाया गया आतंक लगातार जारी है। मनगढ़ंत ईशनिंदा के आरोपों के आधार पर लिंचिंग कोई नई बात नहीं है।” उन्होंने पिछले साल 2025 में हुई उत्सव मंडल की हत्या का भी जिक्र किया।
चिट्ठी में कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदुओं को इतिहास ने बार-बार छोड़ दिया है। इसके साथ ही प्रवासी समूहों ने 1950 के लियाकत-नेहरू पैक्ट का जिक्र भी किया। लियाकत-नेहरू पैक्ट, 1950 में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने का वादा किया गया था, लेकिन यह असल में विफल हो गया। इसमें 1971 के लिबरेशन वॉर के बाद के समय की ओर भी इशारा किया गया, जब भारत गए कई हिंदू रिफ्यूजी को बाद में बांग्लादेश वापस भेज दिया गया था।
वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने मौजूदा हालात को हिंदुओं का नरसंहार बताया। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 से, मानवाधिकार के उल्लंघन पर स्थानीय मीडिया की रिपोर्टिंग लगभग ना के बराबर है। हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों को टारगेट करके गलत जानकारी वाले अभियान के बाद से मीडिया की यह चुप्पी और बढ़ गई।
चिट्ठी में इस्कॉन के वरिष्ठ संत चिन्मय कृष्ण दास के मामले का भी जिक्र किया गया, जिन्हें 25 नवंबर, 2024 से मनगढ़ंत आरोपों को लेकर जेल में रखा गया है और बार-बार जमानत देने से मना किया गया है। लोगों ने बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार पर इसे सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे एक खतरनाक संकेत जाता है कि भीड़ बिना किसी सजा के काम कर सकती है।
चिट्ठी में आगे कहा गया कि अगस्त 2024 और जून 2025 के बीच अल्पसंख्यकों पर 2,442 से ज्यादा हमले हुए और इनमें ज्यादातर हिंदू थे। इस दौरान दर्जनों अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्याएं भी हुईं। समूह ने कहा कि अकेले अगस्त और नवंबर 2024 के बीच 82 लोग मारे गए। इसके साथ ही रेप, मंदिर में तोड़फोड़ और भीड़ द्वारा आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं।
चिट्ठी में बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई यूनिटी काउंसिल के आंकड़ों का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि हाल के हफ्तों में हालात और खराब हो गए हैं। पिछले 35 दिनों में लिंचिंग, शूटिंग और भीड़ के हमलों में 11 हिंदू मारे गए हैं।
विश्व हिंदू प्रवासियों ने भारत से हमलों की सबके सामने निंदा करने की अपील की। इसने एक मानवीय कॉरिडोर, रिफ्यूजी कैंप और यूएन की निगरानी वाले सेफ जोन बनाने की मांग की। इसके साथ ही नई दिल्ली से यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने और कट्टरपंथी समूहों पर राजनयिक और आर्थिक दबाव डालने की भी अपील की।
चिट्ठी में आगे कहा गया कि कई बांग्लादेशी हिंदू बिना सुरक्षित कॉरिडोर के सुरक्षित रूप से भारत नहीं पहुंच सकते। वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने अमेरिका में देश भर में मौन विरोध की योजना की भी घोषणा की।
यह विरोध प्रदर्शन शनिवार, 31 जनवरी को अमेरिका के बड़े शहरों में होना है। आयोजकों ने कहा कि इसका मकसद जागरूकता बढ़ाना और यह मैसेज देना है कि हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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