नई दिल्ली, 15 जनवरी (khabarwala24)। हिमालयी राज्य भूटान की नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत देवथान में स्थित जिग्मे नामग्याल इंजीनियरिंग कॉलेज में गुरुवार को 240 किलोवाट की ग्रिड-एकीकृत और 25 किलोवाट की ऑफ-ग्रिड सौर परियोजना के लिए भूमि पूजन समारोह आयोजित किया गया।
थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “भारत भूटान के स्वच्छ ऊर्जा दृष्टिकोण और सौर क्षमता विकास का समर्थन करने में प्रसन्न है।”
इस सप्ताह की शुरुआत में भूटान के स्वच्छ ऊर्जा दृष्टिकोण की दिशा में एक कदम के रूप में और सौर ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने के लिए, फुएत्योलिंग के विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में 200 किलोवाट की रूफटॉप सौर परियोजना के लिए एक शिलान्यास समारोह भी आयोजित किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11 नवंबर 2025 को भूटान यात्रा के दौरान दोनों देश की सरकारों ने नवीकरणीय ऊर्जा पर मिलकर काम करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। सौर एनर्जी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय और भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के बीच हुआ।
पीएम मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच संबंधों का एक नया और महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, क्योंकि इससे भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा में भारत के अनुभव का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण से संबंधित परियोजनाओं पर मिलकर काम करेंगे और इसे दोनों देशों के लिए परियोजनाओं को एक साथ डिजाइन और विकसित करने की एक अच्छी और व्यावहारिक शुरुआत बताया।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कई भारतीय निजी कंपनियों ने भूटान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रुचि दिखाई है और वे जलविद्युत, सौर और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रही हैं।
समझौते के तहत दोनों देश सौर, पवन, बायोमास और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों पर मिलकर काम करेंगे। यह योजना स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण के लिए भारत के तकनीकी ज्ञान और भूटान की प्राकृतिक ऊर्जा क्षमता को जोड़ती है।
भारत ने भूटान की ऊर्जा परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए 4,000 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट की भी घोषणा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वित्तीय सहायता का उपयोग नई साझेदारी के तहत सहमत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए किया जाएगा।
इस समझौते से दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी साझाकरण के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से मजबूत आर्थिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भी है।
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