गांधीनगर, 12 जनवरी (khabarwala24)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की मौजूदगी में भारत-जर्मनी के बीच हुए गेम चेंजर मेगा प्रोजेक्ट का उल्लेख किया। सोमवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कनवेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए विभिन्न समझौतों की अहमियत बताई।
प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा, “स्वामी विवेकानंद जयंती के दिन चांसलर मर्ज का भारत में स्वागत करना मेरे लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। ये एक सुखद संयोग है कि स्वामी विवेकानंद जी ने ही भारत और जर्मनी के बीच दर्शन, ज्ञान और आत्मा का सेतु बनाया था। आज चांसलर मर्ज की यह यात्रा उसी सेतु को नई ऊर्जा, नया विश्वास और नया विस्तार प्रदान कर रही है। चांसलर के रूप में यह उनकी भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की भी पहली यात्रा है। यह इस बात का सशक्त प्रमाण है कि वे भारत के साथ संबंधों को कितना गहरा महत्व देते हैं।”
पीएम मोदी ने इस यात्रा को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि भारत और जर्मनी जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच करीबी सहयोग पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने हमारे स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप को नई ऊर्जा दी है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार अब तक के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है और 50 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में मौजूद हैं। ये भारत के प्रति उनके अटूट विश्वास और यहां मौजूद अनंत संभावनाओं को दर्शाता है। आज सुबह भारत-जर्मनी सीईओ फोरम में इसकी जीवंत झलक दिखाई दी।
प्रधानमंत्री ने उन समझौतों और सहयोग की बात की जो दोनों देशों के बीच है। बोले, “भारत और जर्मनी के बीच टेक्नोलॉजी सहयोग प्रति वर्ष मजबूत हुआ है और आज इसका प्रभाव जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं। इसमें सहयोग को बढ़ाने के लिए हमने इंडिया–जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय लिया है। ये नॉलेज, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन का साझा मंच बनेगा। हम क्लाइमेट, एनर्जी, अर्बन डेवलपमेंट और अर्बन मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।”
इसके साथ ही पीएम मोदी ने उस मेगा प्रोजेक्ट की बात की जो दोनों देशों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहा, “ग्रीन हाइड्रोजन में दोनों देशों की कंपनियों का नया मेगाप्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। भारत और जर्मनी सिक्योर, ट्रस्टेड, और रेसिलिएंट सप्लाई चेन्स निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इन सभी विषयों पर आज किए जा रहे एमओयू से हमारे सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी।
पीएम मोदी ने रक्षा उद्योग के रोडमैप की बात की। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मर्ज का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन के नए अवसर खुलेंगे।
प्रधानमंत्री ने आम लोगों के बीच बने रिश्ते पर प्रकाश डाला। रवीन्द्रनाथ टैगोर और मैडम कामा का जिक्र करते हुए कहा, भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे पीपल-टू-पिपल-टाइस हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया, और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत की आजादी का ध्वज फहराकर, हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी। आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं।”
भारत के स्किल को अहम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “माइग्रेशन, मोबिलिटी और स्कीलिंग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। भारत की टैलेंटेड युवाशक्ति जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। आज ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप पर जारी ज्वाइंट डेक्लेरेशन ऑफ इंटेंट इसी भरोसे का प्रतीक है। इससे खास तौर पर हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान होगी। आज हमने खेलों के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यह युवाओं को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ” आज हायर एजुकेशन पर बना कॉम्प्रिहेंसिव रोडमैप शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा। मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण देता हूं। भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा के लिए मैं चांसलर मर्ज का आभार व्यक्त करता हूं। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच नज़दीकियां और बढ़ेंगी। मुझे खुशी है कि गुजरात के लोथल में बनाए जा रहे नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्पलेक्स से जर्मन मेरीटाइम म्युजियम जुड़ रहा है। यह दोनों देशों की मैरिटाइम को जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम है। ट्रेडिशनल मेडिसिन्स के क्षेत्र में गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का जर्मनी के साथ करीबी सहयोग रहा है। इस महत्वपूर्ण विषय पर आज किए जा रहे एमओयू से हमारे सहयोग को और अधिक बल मिलेगा।
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