नई दिल्ली, 11 जनवरी (khabarwala24)। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे हुए हैं। रविवार को वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी शामिल होंगे।
भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत व्यापार और निवेश संबंधों, बढ़ते रक्षा और सुरक्षा सहयोग, क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट एक्शन, कटिंग-एज एसएंडटी सहयोग, कल्चरल एक्सचेंज और तेजी से बढ़ती शिक्षा साझेदारी पर बनी है। दोनों देशों के बीच यह संबंध इंडो-पैसिफिक और यूरोप के भविष्य को आकार दे रहा है।
जर्मनी भारत का रणनीतिक साझेदार है और यूरोप में भारत के सबसे जरूरी साझेदारों में से एक है। चांसलर मर्ज का यह भारत का पहला दौरा है और चांसलर के तौर पर एशिया का उनका पहला दौरा है।
भारत 7 मार्च 1951 को जर्मनी के साथ राजनयिक संबंध बनाने वाले पहले देशों में से एक था। भारत और जर्मनी इस साल 2026 में राजनयिक संबंध बनने के 75 साल का जश्न मनाएंगे।
बता दें, भारत और जर्मनी ने 18 मई 2000 को 21वीं सदी में भारत-जर्मनी साझेदारी के एजेंडा पर हस्ताक्षर किया था। इस रणनीतिक साझेदारी ने 2025 में 25 साल पूरे किए। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और जर्मनी के विदेश मंत्री वाडेफुल ने मई 2025 में इसकी याद में एक आधिकारिक लोगो लॉन्च किया था।
राष्ट्र प्रमुख 2011 से इंटर-गवर्नमेंटल कंसल्टेशन (आईजीसी फ्रेमवर्क) के जरिए सहयोग का पूरा रिव्यू करते हैं और काम के नए क्षेत्रों की पहचान करते हैं। 7वीं आईजीसी अक्टूबर 2025, 2024 को नई दिल्ली में हुई थी।
दोनों देशों के बीच यह संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डर का सम्मान करने और बहुपक्षवाद को समर्थन करने की नींव पर बना है। भारत और जर्मनी एक-दूसरे से सलाह भी लेते हैं और बहुपक्षीय फोरम में अपनी स्थिति में सहयोग करते हैं।
इसके अलावा, दोनों देश जी4 के फ्रेमवर्क के अंदर यूएनएससी के विस्तार पर एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। विदेश मंत्रियों के स्तर पर जी4 की आखिरी बैठक सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क में 80वीं यूएनजीए के दौरान हुई थी।
पीएम मोदी ने 2022 में छठे आईजीसी समिट के लिए बर्लिन का दौरा किया और उसके बाद जून 2022 में 48वें जी7 समिट के लिए म्यूनिख का दौरा किया। तब चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने फरवरी 2023 में भारत का राजकीय दौरा किया और 7वें आईजीसी समिट के लिए अक्टूबर 2024 में फिर से नई दिल्ली आए।
इसके बाद जर्मनी में नई सरकार बनने के बाद, पीएम मोदी ने 20 मई 2025 को चांसलर मर्ज से बात की। दोनों नेता 17 जून 2025 को कनाडा में जी7 समिट और 22 नवंबर 2025 को जोहान्सबर्ग में जी20 समिट के दौरान भी मिले।
जर्मनी में करीब 3 लाख भारतीय पासपोर्ट होल्डर और भारतीय मूल के लोग हैं, जिनमें करीब 60,000 स्टूडेंट हैं। प्रवासी भारतीयों में ज्यादातर प्रोफेशनल, शोधकर्ता और वैज्ञानिक, व्यापार करने वाले लोग, नर्स और स्टूडेंट शामिल हैं। पिछले कुछ सालों में आईटी, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों में काबिल भारतीय प्रोफेशनल की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।
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