Khabarwala24 UP News: उत्तर प्रदेश में कोडीन वाली नशीली कफ सिरप की तस्करी का बड़ा कांड सामने आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मंगलवार को लखनऊ से एक बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आलोक इस 100 करोड़ के अवैध कारोबार का अहम हिस्सा था।
उसके फरार होने पर लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था। पूछताछ में आलोक ने बताया कि वह सरेंडर करने ही वाला था, लेकिन STF ने पहले ही उसे पकड़ लिया। पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ आलोक की कई तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।
कफ सिरप तस्करी का काला कारोबार: 7 राज्यों में फैला नेटवर्क (UP News)
यह मामला फेन्सेडिल जैसी कोडीन-मिक्स्ड कफ सिरप की तस्करी का है, जो नशे के लिए इस्तेमाल होती है। STF के मुताबिक, यह सिंडिकेट उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित 7 राज्यों में फैला हुआ था। बांग्लादेश तक स्मगलिंग हो रही थी। नवंबर 2025 से STF ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। 12 नवंबर को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी में चार लोगों को पकड़ा गया – विभोर राणा, विशाल सिंह, बिट्टू कुमार और सचिन कुमार।
इनके पास से लाखों की नशीली सिरप बरामद हुई। उसके बाद 27 नवंबर को अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को गोमतीनगर से गिरफ्तार किया। अमित टाटा के पास फॉर्च्यूनर कार, मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद हुए। 30 नवंबर को भोला जायसवाल पकड़ा गया। अब आलोक सिंह की गिरफ्तारी से कुल 3 मुख्य आरोपी हिरासत में हैं।
आलोक सिंह का अपराधिक इतिहास: 2006 की सोना लूट से शुरू
आलोक सिंह मूल रूप से चंदौली का रहने वाला है। लखनऊ के नाका थाने के मोतीनगर में उसका घर है। 2006 में प्रयागराज के एक कारोबारी से लखनऊ में 4 किलो सोना लूटा गया था। इस केस में आलोक समेत 7 लोग आरोपी बने – दरोगा संतोष सिंह, बृजनाथ यादव, सिपाही सुशील पचौरी, संतोष तिवारी, नीरज गुप्ता और सुभाष।
पुलिस ने शुरुआत में 3 किलो सोना बरामद किया था। आलोक और सुशील को लाइन हाजिर कर बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन कोर्ट में केस गया तो आलोक के हक में फैसला आया। 27 सितंबर 2022 को उसे फिर से सेवा में बहाल कर दिया गया। लेकिन नाका क्षेत्र में व्यापारी से लूट जैसे कई केस लगे तो फिर लाइन हाजिर हो गया। इसी दौरान आलोक ने रियल एस्टेट में हाथ आजमाया और करोड़पति बन गया।
धनंजय सिंह से नजदीकियां: हमला केस और वायरल तस्वीरें
आलोक की जिंदगी में ट्विस्ट तब आया जब वह पूर्व सांसद धनंजय सिंह के करीब आ गया। 2019 में हजरतगंज में मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधियों पर हमले का आरोप धनंजय और आलोक पर लगा। अमित टाटा की गिरफ्तारी के बाद भी धनंजय के साथ उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई रहीं। धनंजय ने सफाई दी कि आलोक को वह छठी क्लास से जानते हैं।
अमित टाटा गिरफ्तार होते ही धनंजय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया – “मेरे खिलाफ साजिश रची जा रही है। कोडीन सिरप तस्करी की CBI जांच होनी चाहिए। मैं पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी को पत्र लिखूंगा।” धनंजय ने दावा किया कि विपक्ष उन्हें बदनाम कर रहा है।
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का आरोप: वोटर लिस्ट में एक ही घर
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने जौनपुर के मल्हनी विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट शेयर की। इसमें धनंजय सिंह, उनकी पत्नी श्रीकला सिंह और भाई जितेंद्र सिंह के साथ आलोक प्रताप सिंह का नाम एक ही मकान नंबर 17 पर दर्ज है। ठाकुर ने UP के मुख्य सचिव और DGP को शिकायत भेजी। कहा – “STF के आरोपी दुबई भाग रहे हैं, लेकिन प्रभावशाली लोग बच रहे हैं। STF की भूमिका पर सवाल हैं।” ठाकुर ने PM को भी पत्र लिखा कि CBI जांच हो।
दुबई कनेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग: ED की संयुक्त पूछताछ
STF को शक है कि आलोक से पूछताछ में दुबई का कनेक्शन खुलेगा। सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दुबई से ऑपरेट कर रहा है। आलोक के रियल एस्टेट बिजनेस, फर्जी फर्मों और स्लीपर सेल की जांच होगी। खासकर उन सफेदपोशों की भूमिका पर फोकस है जो इस नेटवर्क को संरक्षण दे रहे थे।
ED और STF मिलकर आलोक से पूछताछ करेंगे। ED को लगता है कि 100 करोड़ से ज्यादा के इस कारोबार में मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। आलोक की बैंक ट्रांजेक्शन, विदेश यात्राएं और संपर्कों की छानबीन होगी। STF इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडे ने बताया कि आलोक विदेश भागने की फिराक में था।
राजनीतिक हलचल: विपक्ष ने BJP पर निशाना साधा
इस केस ने सियासत गरमा दी। कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और SP सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कुछ सफेदपोश BJP से जुड़े हैं। डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने जवाब दिया – “जांच पूरी होने दो, दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।” धनंजय ने PM और CM को पत्र लिखा कि CBI जांच से सच्चाई सामने आएगी। STF ने 28 फर्मों पर FIR दर्ज की, जिनमें से 12 बंद पाई गईं। इनमें श्री हरि प्रहमा एंड सर्जिकल एजेंसी, विश्वनाथ मेडिकल एजेंसी जैसे नाम शामिल हैं।
आगे की कार्रवाई: शुभम जायसवाल अभी फरार (UP News)
STF अभी भी मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल की तलाश में है। उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल गिरफ्तार हैं। वाराणसी, जौनपुर में SIT बनी हैं। फर्जी बिलिंग और स्टॉक डायवर्शन की जांच तेज है। डिप्टी CM ने कहा कि हर दोषी पकड़ा जाएगा। यह कांड नशे के खिलाफ यूपी सरकार की सख्ती दिखाता है। लेकिन आलोक जैसे पूर्व पुलिसकर्मियों की संलिप्तता से सवाल उठे हैं कि सिस्टम में कहां चूक हुई।
आलोक की गिरफ्तारी से कफ सिरप तस्करी के कई राज खुल सकते हैं। लेकिन दुबई कनेक्शन और राजनीतिक पैठ अभी रहस्य बनी हुई है। STF को उम्मीद है कि पूछताछ से पूरा नेटवर्क बेनकाब हो जाएगा। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सियासी स्तर पर भी बड़ा असर डालेगा।
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