Khabarwala24 News: प्रयागराज (Prayagraj) में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक दादा ने तांत्रिक के कहने पर अपने ही 17 साल के पोते की बलि दे दी। आरोपी सरन सिंह ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने मां काली की पूजा के लिए अपने पोते पीयूष उर्फ यश की हत्या की और उसके शव के चार टुकड़े करके अलग-अलग जगहों पर फेंक दिए। इस जघन्य अपराध की योजना उसने एक महीने पहले बनाई थी।
तांत्रिक के जाल में फंसा दादा, बनाई हत्या की योजना
प्रयागराज (Prayagraj) के करेली थाना क्षेत्र में रहने वाले सरन सिंह ने पुलिस को बताया कि वह तांत्रिक के प्रभाव में आ गया था। तांत्रिक ने उसे बताया कि उसके परिवार पर जादू-टोना और काली छाया का प्रभाव है। तांत्रिक का दावा था कि यह सब सरन की भाभी यानी पीयूष की दादी ने किया है। उसने कहा कि भाभी के परिवार के किसी बच्चे की बलि देने से यह काला जादू खत्म हो जाएगा। इस बात को मानकर सरन ने अपने 17 साल के पोते पीयूष की हत्या की योजना बनाई।
सरन ने बताया कि उसने एक महीने पहले ही इस अपराध की पूरी तैयारी कर ली थी। उसने हत्या के लिए आरी और चापड़ खरीदा, शव के टुकड़ों को भरने के लिए पॉलीथिन बैग का इंतजाम किया और बदबू छिपाने के लिए 4 लीटर इत्र और 100 धूपबत्तियां खरीदीं। उसने पीयूष को बहाने से अपने घर बुलाया और फिर मां काली की प्रतिमा के सामने मंत्र पढ़ते हुए उसकी बलि दे दी।
कैसे हुई हत्या? सरन का पुलिस को कबूलनामा
सरन सिंह ने पुलिस को बताया कि उसने पीयूष को किडनैप करने के लिए एक महीने तक उसकी रेकी की। वह रोज सुबह पीयूष के स्कूल जाने के समय उससे बात करता और उसका विश्वास जीतने की कोशिश करता। 26 अगस्त को जब पीयूष स्कूल के लिए निकला, सरन ने उसे अपने घर बुला लिया। इसके बाद उसने पीयूष के सिर पर ईंट से वार किया, जिससे वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
सरन ने बताया कि उसने मां काली की प्रतिमा के सामने चौकी सजाई और तंत्र-मंत्र शुरू किया। जब पीयूष को होश आने लगा, तो सरन ने तकिए से उसका मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने आरी से सबसे पहले पीयूष का सिर काटा, फिर दोनों हाथ और पैर अलग किए। शव के टुकड़ों को पॉलीथिन में भरा और खून की बदबू छिपाने के लिए कमरे में इत्र छिड़का और 100 धूपबत्तियां जलाईं।
शव के टुकड़े कहां-कहां फेंके गए?
हत्या के बाद सरन ने शव के टुकड़ों को अलग-अलग जगहों पर फेंकने की योजना बनाई ताकि वह पकड़ा न जाए। उसने पीयूष के सिर को रसूलपुर कछार के पास कूड़े के ढेर में फेंक दिया। दोनों हाथ और पैर अतारसुईया थाना क्षेत्र के एक नाले में फेंके। धड़ को पहले साड़ी में लपेटा, फिर पॉलीथिन में डाला और स्कूटी पर रखकर नैनी पुल पार किया। वहां औद्योगिक थाना क्षेत्र में हाईटेक सिटी के पास नाले में धड़ फेंक दिया।
पुलिस ने बताया कि सरन ने 26 अगस्त की सुबह हत्या की और शाम तक शव के टुकड़े फेंकता रहा। उसकी इस हरकत को छिपाने के लिए वह सुबह-शाम अपने घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठता रहा, ताकि किसी को शक न हो।
पुलिस ने कैसे पकड़ा आरोपी को?
पीयूष के घर न लौटने पर उसकी मां कामिनी ने स्कूल में संपर्क किया, जहां पता चला कि वह स्कूल पहुंचा ही नहीं था। परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दो टीमें बनाकर जांच शुरू की और करीब 200 सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के दौरान एक महिला ने पुलिस को बताया कि उसने एक व्यक्ति को नाले में शव फेंकते देखा है। पुलिस ने उस क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें सरन सिंह नजर आया।
परिजनों ने फुटेज देखकर सरन की पहचान की और पुलिस ने उसे 27 अगस्त की सुबह उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सरन ने अपना जुर्म कबूल किया और पुलिस ने उसकी निशानदेही पर 4 घंटे में शव के सभी टुकड़े बरामद कर लिए।
तांत्रिक की तलाश में पुलिस, परिवार पर क्या बीती?
डीसीपी अभिषेक भारती ने बताया कि सरन सिंह पीयूष का चचेरा दादा है। उसने पूछताछ में बताया कि 2023 में उसकी बेटी ने फांसी लगाकर और 2024 में उसके बेटे ने यमुना पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद वह तांत्रिक के संपर्क में आया, जिसने उसे जादू-टोना का डर दिखाकर बलि देने की सलाह दी। तांत्रिक फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
पीयूष की मां कामिनी ने बताया कि उनका बेटा सुबह 8:30 बजे स्कूल के लिए निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। स्कूल और दोस्तों से पूछताछ के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। परिवार सदमे में है और इस क्रूर घटना से टूट गया है। पीयूष के बड़े भाई ध्रुव ने बताया कि सरन पहले चोरी का काम करता था और बाद में तंत्र-मंत्र में शामिल हो गया। उसने मांग की कि सरन को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
पीयूष का परिवार और उसकी जिंदगी
17 साल का पीयूष 11वीं कक्षा में पढ़ता था और करेली के सरस्वती विद्या मंदिर में उसका दाखिला था। उसके पिता अजय सिंह की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। वह अपनी मां कामिनी और दो बड़े भाइयों समीर सिंह और ध्रुव के साथ रहता था। परिवार सदियापुर गुरुद्वारे के पास रहता था, जहां सरन सिंह का घर भी पास में ही था। पीयूष का परिवार सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन इस घटना ने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।
इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना
प्रयागराज (Prayagraj) की यह घटना न केवल एक परिवार के लिए दुखद है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है। तांत्रिकों के बहकावे में आकर एक दादा ने अपने पोते की जान ले ली, जो मानवता पर एक बड़ा धब्बा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और तांत्रिक की तलाश जारी है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज को जागरूकता फैलाने और अंधविश्वास के खिलाफ कदम उठाने की जरूरत है।
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