हापुड़ के जवाहरगंज क्षेत्र में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा व्यास डॉ. शैल बिहारी दास ने पहले दिन की कथा में बताया कि भागवत कथा जीवन के उद्देश्य और सही दिशा दिखाती है। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में हिस्सा लिया और कथा स्थल पर पूजा-हवन के बाद कथा का आनंद उठाया।
कलश यात्रा का भव्य आयोजन
जवाहरगंज से शुरू हुई कलश यात्रा आर्यनगर होते हुए माहेश्वरी मंदिर पहुंची। यहां पूजा-अर्चना के बाद यात्रा दिल्ली-गढ़ रोड से होती हुई वापस जवाहरगंज के कथा स्थल पर संपन्न हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पीले वस्त्र पहने और सिर पर कलश रखकर शामिल हुईं। इससे पहले कथा स्थल पर हवन और पूजन किया गया।

कलश का धार्मिक महत्व
डॉ. शैल बिहारी दास ने बताया कि कलश रिद्धि-सिद्धि का प्रतीक है और हिंदू धर्म में इसका खास महत्व है। कलश जीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर पर इस्तेमाल होता है। जन्म के समय कलश स्थापना होती है और मृत्यु के बाद भी शरीर के साथ कलश विसर्जन किया जाता है।

भागवत कथा क्यों खास है
कथा का शुभारंभ करते हुए डॉ. शैल बिहारी दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन का उद्देश्य और सही मार्ग बताती है। जहां भागवत कथा होती है, वहां सुनने मात्र से पूरा क्षेत्र नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त होकर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। कथा सुनने से मन को शांति और जीवन में दिशा मिलती है।

बड़े उत्साह से शामिल हुए श्रद्धालु
इस मौके पर अमित मुन्ना, डॉ. सुमन अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, भावना अग्रवाल, शांतनु सिंघल, पूनम कर्णवाल, चंद्र प्रकाश ठठेरे, याशी बंसल, संजीव रस्तोगी, राहुल, बिट्टू, यर्थाथ अग्रवाल सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे। सभी ने कथा का रसपान किया और आयोजन की सराहना की।
यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए आध्यात्मिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है। कथा के आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।


