हापुड़ बुलंदशहर रोड श्री मां मनसा देवी मंदिर में 16वें वार्षिक उत्सव की श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन भक्तिमय माहौल में बीता। कथाव्यास आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने बड़ी भीड़ वाले श्रद्धालुओं को भक्ति-वैराग्य का महत्व बताया। राजा परीक्षित के जन्म, सात दिन के श्राप, कलयुग प्रभाव, वराह अवतार और विदुर जी की भक्ति की कथाएं सुनाईं। मंदिर को फूलों और लाइटों से सजाया गया। मुख्य यजमान संदीप गोयल ने महाआरती की। तीसरे दिन सती, ध्रुव और जड़ भरत चरित्र सुनाए जाएंगे।
श्रीमद्भागवत कथा हापुड़: भक्ति ही जीवन का सार, आचार्य जी का संदेश
हापुड़ के बुलंदशहर रोड पर स्थित श्री मां मनसा देवी मंदिर में 16वें वार्षिक उत्सव के दौरान श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जोर-शोर से चल रहा है। दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने साफ कहा कि इंसान का जीवन सिर्फ दुनिया की सुख-सुविधाओं के लिए नहीं मिला, बल्कि भगवान की भक्ति और मोक्ष के लिए मिला है। वैराग्य अपनाकर भक्ति करो, तभी जीवन सार्थक होता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और मंदिर प्रांगण रंग-बिरंगी लाइटों व फूल बंगलों से जगमगा उठा। यह आयोजन स्थानीय लोगों के बीच आध्यात्मिक जोश भर रहा है।
राजा परीक्षित जन्म और कलयुग का श्राप: मोक्ष का मार्ग चुना राजा ने
कथा का आगाज राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग से हुआ। आचार्य जी ने बताया कि परीक्षित को सात दिनों में मौत का श्राप मिला, लेकिन वे घबराए नहीं। शुकदेव महाराज के आने पर उन्होंने भागवत कथा सुनी और मोक्ष पा लिया। गुरु के आने से अज्ञान का अंधेरा मिट जाता है। परीक्षित और कलयुग के संवाद से साफ हुआ कि कलयुग में अधर्म, नशा और लोभ का राज चलता है। इनसे बचो, भक्ति करो। श्रद्धालु इन कथाओं से जीवन के सबक ले रहे हैं।
वराह अवतार कथा: भगवान ने पृथ्वी की रक्षा की
आगे वराह अवतार की कहानी सुनाई। असुर हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को पाताल ले गया। तब भगवान विष्णु ने वराह रूप लिया, पृथ्वी को निकाला और रक्षा की। आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने कहा, भगवान हमेशा धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। यह कथा भक्तों को धैर्य और विश्वास सिखाती है।
विदुर भक्ति प्रसंग: भगवान सच्चे प्रेम के भूखे हैं
विदुर जी की भक्ति का जिक्र करते हुए कथावाचक बोले, श्रीकृष्ण ने छप्पन भोग छोड़कर विदुर के घर साग खाया। वजह सिर्फ विदुर का सच्चा भाव था। भगवान धन-पद नहीं, प्रेम और श्रद्धा चाहते हैं। यह सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। दैनिक भास्कर जैसी खबरों में भी इस कथा सीरीज की चर्चा है, जहां आचार्य जी ने तीसरे दिन सती-ध्रुव कथाएं सुनाईं।
महाआरती और तीसरे दिन का प्लान: सती-ध्रुव-जड़ भरत चरित्र
कथा समाप्ति पर मुख्य यजमान संदीप गोयल ने परिवार संग भागवत जी की महाआरती की। मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी महेश तोमर ने बताया, तीसरे दिन सती चरित्र, ध्रुव चरित्र और जड़ भरत की कथा विस्तार से होगी। पूरे उत्सव में भक्ति का माहौल बना रहेगा।
सहयोगी नामों की सूची: मंदिर समिति का योगदान
इस आयोजन में प्रबंधक शिवकुमार मित्तल, महेश तोमर, अनुज मित्तल, विजेंद्र कंसल, खिलैन्द्र सैनी, मधुसूदन गोयल, लाला राजकिशोर, मनोज कंसल, रितु मित्तल, कविता कंसल, दुर्गेश तोमर, अंजलि सैनी, दीपांशी सैनी, पंकिल मित्तल, महिमा सैनी, सोनिया बजाज, हरदेई शर्मा, अन्जु सिंह, सरोज देवी, सोनू सैनी, अजय गुप्ता, पराग कंसल, कालीचरण सैनी, दिव्यांश मित्तल, सुनील सैनी, अनंत स्वामी, रामभुवन, सोनू कुमार, हनी सैनी आदि ने सहयोग किया। दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान जैसी न्यूज में कथा के विभिन्न दिनों की कवरेज से इसकी लोकप्रियता साफ झलकती है।
यह श्रीमद्भागवत कथा हापुड़ मनसा देवी मंदिर भक्तों को जीवन मूल्य सिखा रही है। आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज की वाणी से हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हो रहे। उत्सव जारी है, तीसरा दिन भी भव्य होगा।
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