हापुड़, 17 दिसंबर (Khabarwala24)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बैंच स्थापित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर हापुड़ के अधिवक्ताओं ने बुधवार को बड़ा प्रदर्शन किया। हापुड़ बार एसोसिएशन के आह्वान पर सैकड़ों वकीलों ने कचहरी से पैदल मार्च निकाला, मानव श्रृंखला बनाई और नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान यातायात प्रभावित हुआ और जाम लग गया। अंत में अधिवक्ताओं ने डिप्टी कलेक्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर जल्द बैंच स्थापना की मांग की।
प्रदर्शन का आयोजन और मार्च का रूट
हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कंसल और सचिव वीरेंद्र सैनी के नेतृत्व में बुधवार सुबह सैकड़ों अधिवक्ता कचहरी परिसर से पैदल मार्च के लिए निकले। मार्च कचहरी से शुरू होकर रेलवे पार्क तक गया। इसके बाद सभी अधिवक्ता वापस तहसील चौपला पर पहुंचे। यहां उन्होंने हाथ जोड़कर मानव श्रृंखला बनाई और जोर-शोर से नारे लगाए। इस मानव श्रृंखला की वजह से कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात बाधित हो गया और जाम लग गया। जाम में फंसे लोगों को काफी परेशानी हुई।
हापुड़ : हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों का प्रदर्शन, सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वकील, पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की चल रही है मांग#Hapur #LawyersProtest #HighCourtBench #WesternUP #hapurnews #UttarPradesh #UPNews pic.twitter.com/hXxcr50J7A
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अधिकारियों की मौजूदगी में सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही डिप्टी कलेक्टर शुभम श्रीवास्तव, सीओ सिटी वरुण मिश्रा और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह बिष्ट मौके पर पहुंच गए। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इन अधिकारियों के सामने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बैंच की स्थापना की मांग दोहराई गई।

क्यों जरूरी है पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बैंच?
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने बताया कि उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रयागराज में है और उसकी एकमात्र बैंच लखनऊ में है। लखनऊ बैंच को सिर्फ आसपास के 15 जिलों का काम दिया गया है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी 22 जिलों का मामला प्रयागराज हाईकोर्ट में ही देखा जाता है। इन 22 जिलों की आबादी करीब सात करोड़ से ज्यादा है। सहारनपुर जैसे दूर के जिले से प्रयागराज की दूरी 850 किलोमीटर से अधिक है। अन्य जिलों से भी दूरी 500 से 850 किलोमीटर तक रहती है।

इस लंबी दूरी की वजह से मुकदमा लड़ने वाले लोग और अधिवक्ता दोनों को भारी परेशानी होती है। यात्रा का खर्च, समय की बर्बादी और अन्य दिक्कतों से आम नागरिक को सस्ता और आसान न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पिछले करीब 50 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकील इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रधानमंत्री से क्या मांगा गया?
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों और वकीलों को आसान, सुलभ और सस्ता न्याय मिले। इसके लिए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देकर क्षेत्र में हाईकोर्ट बैंच की जल्द स्थापना कराई जाए।
यह प्रदर्शन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी चल रहे आंदोलन का हिस्सा है, जहां वकील लंबे समय से इसी मांग को उठा रहे हैं।
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