हापुड़ (khabarwala24 News)। हापुड़ में UGC एक्ट के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ है। राष्ट्रीय सैनिक संस्था के कार्यकर्ताओं ने इस कानून को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और इसे समाज में जातीय असमानता फैलाने वाला बताया।
हापुड़ में रक्त से लिखा पत्र राष्ट्रपति को सौंपा
आज हापुड़ जिले में राष्ट्रीय सैनिक संस्था के तहत एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदेश प्रवक्ता और हापुड़ जिला अध्यक्ष ज्ञानेंद्र त्यागी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने शहीद स्तंभ पर जमा होकर अपना खून निकाला। इसी खून से उन्होंने राष्ट्रपति महोदय के नाम एक पत्र लिखा, जिसमें UGC एक्ट की नीतियों पर सवाल उठाए गए और इसे वापस लेने की मांग की गई।
यह पत्र उप जिलाधिकारी इला प्रकाश को सौंपा गया। ज्ञानेंद्र त्यागी और युवा कमांड के जिला उपाध्यक्ष अनिल त्यागी ने इस दौरान मुख्य भूमिका निभाई। उनका कहना है कि UGC के नए नियम सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर एक समान लागू होते हैं, लेकिन ये नियम कठोर हैं और समाज में जातीय भेदभाव बढ़ा सकते हैं।

UGC एक्ट से सामाजिक समरसता पर खतरा: संस्था का दावा
राष्ट्रीय सैनिक संस्था का मानना है कि UGC एक्ट के कुछ प्रावधान सामाजिक समरसता को बिगाड़ सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि इस कानून पर पुनर्विचार किया जाए और इसे निरस्त किया जाए। संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो सड़कों पर विरोध जारी रहेगा।
यह प्रदर्शन एक जागरूक नागरिक के तौर पर भारत सरकार का ध्यान UGC की कार्यप्रणाली की ओर खींचने के लिए किया गया। संस्था के अनुसार, ये नियम देश के शिक्षा तंत्र में एकरूपता लाने के नाम पर असमानता पैदा कर रहे हैं।
विरोध में शामिल हुए प्रमुख पदाधिकारी और संगठन
इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय सैनिक संस्था के कई बड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। जिला संरक्षक शशांक मुनि, सुधीर त्यागी, जिला प्रवक्ता गुलशन त्यागी, जिला संयोजक चौधरी निखिल त्यागी, जिला सूचना प्रसारण मंत्री श्याम वर्मा, पूर्व जिला कोषाध्यक्ष सुभाष चन्द्र शर्मा, नगर संगठन मंत्री संजीव मोटे और प्रशासनिक सदस्य राजीव त्यागी उपैडा शामिल थे।
इसके अलावा ग्राम प्रधान संगठन, ब्राह्मण समाज के पं. नानकचंद शर्मा, प्रेम पंडित, त्यागी आकाश त्यागी, प्रदीप त्यागी, विकास शर्मा, विक्की शर्मा, विनित बंसल, दीपक त्यागी जैसे लोग भी पहुंचे। स्वाधीनता शहीद स्मारक समिति, गायत्री परिवार, त्यागी समाज और स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधि भी इस विरोध में शामिल हुए।


