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Hapur News सरस्वती मेडिकल कॉलेज हापुड़ में नवजात शिशुओं की जीवनरक्षा पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला

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Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और जीवनरक्षा से जुड़े कौशल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल, हापुड़ में बेसिक नियोनेटल रेससिटेशन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, इंटर्न्स और स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रसव सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं की आपात स्थिति में प्रभावी उपचार के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था।

नवजात शिशुओं की आपात स्थिति में उपचार पर विशेष प्रशिक्षण (Hapur News)

बेसिक नियोनेटल रेससिटेशन प्रोग्राम एक संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों को उन नवजात शिशुओं के प्रबंधन के लिए तैयार करना है, जिन्हें जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में कठिनाई होती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नवजात शिशु के प्रारंभिक मूल्यांकन, वायुमार्ग प्रबंधन, प्रभावी वेंटिलेशन तथा जन्म के बाद सांस न ले पाने वाले शिशुओं को स्थिर करने की तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

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कार्यशाला में यह भी बताया गया कि समय पर और सही तरीके से नियोनेटल रेससिटेशन देने से नवजात मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेष रूप से जन्म के समय होने वाले श्वास अवरोध (बर्थ एस्फिक्सिया) और श्वसन कष्ट जैसी स्थितियों में यह तकनीक जीवनरक्षक साबित होती है।

विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव (Hapur News)

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन डॉ. योगेश कुमार गोयल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (बाल रोग विभाग), सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, हापुड़ के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को नियोनेटल रेससिटेशन की महत्वपूर्ण तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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कार्यक्रम में प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। इनमें डॉ. ब्रजेंद्र सिंह, सहायक प्रोफेसर के.एस.जी.एम.सी. मेडिकल कॉलेज (कोर्स समन्वयक), डॉ. मनीष अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज, डॉ. अनुपमा वर्मा, प्रोफेसर एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज तथा डॉ. विवेक त्यागी, एसोसिएट प्रोफेसर टी.एम.यू. मेडिकल कॉलेज शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने सैद्धांतिक व्याख्यान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण चिकित्सा तकनीकों की जानकारी दी।

सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण से बढ़ी समझ (Hapur News)

कार्यशाला के दौरान इंटरैक्टिव लेक्चर, सिमुलेशन आधारित डेमोंस्ट्रेशन और प्रैक्टिकल सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं से जुड़ी आपात स्थितियों का प्रबंधन करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

इस प्रशिक्षण में बाल रोग विभाग के फैकल्टी सदस्यों, स्नातकोत्तर छात्रों, इंटर्न्स, जूनियर डॉक्टरों के साथ-साथ प्रसव एवं नवजात देखभाल से जुड़े नर्सिंग स्टाफ और लेबर रूम तथा नियोनेटल यूनिट में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

आयोजन समिति का महत्वपूर्ण योगदान (Hapur News)

कार्यक्रम का आयोजन सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ की आयोजन समिति के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में डॉ. योगेश कुमार गोयल (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग), डॉ. सी. एस. (मेजर जनरल) अहलुवालिया, चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. बरखा गुप्ता, डीन एवं प्रिंसिपल तथा डॉ. अंशुमान श्रीवास्तव, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग, जी.एस. मेडिकल कॉलेज एवं इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के सचिव, गाजियाबाद का विशेष सहयोग रहा।

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संस्थान प्रबंधन ने दी बधाई (Hapur News)

इस अवसर पर सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन तथा वाइस चेयरपर्सन सुश्री रम्या रामचंद्रन ने आयोजन टीम और प्रतिभागियों को सफल प्रशिक्षण कार्यशाला के लिए बधाई दी।

इसके अलावा प्रिंसिपल डॉ. बरखा गुप्ता, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन तथा डायरेक्टर रघुवर दत्त ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और जीवनरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा (Hapur News)

विशेषज्ञों का कहना है कि नियोनेटल रेससिटेशन जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है और उनके बेहतर न्यूरोलॉजिकल विकास में भी मदद मिलती है।

ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को मजबूत करते हैं और चिकित्सा शिक्षा तथा कौशल विकास को बढ़ावा देते हैं। साथ ही यह राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल, हापुड़ भविष्य में भी इस तरह के कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिल सके और नवजात शिशुओं की देखभाल के स्तर को और बेहतर बनाया जा सके।
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