Hapur दशलक्षण पर्व का भव्य आयोजन: रोहित जैन शास्त्री के सानिध्य में उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन, संगीतमय पूजा-अर्चना

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Khabarwala 24 News Hapur:(तुषार जैन) यूपी के जनपद हापुड़ (Hapur) के श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कसेरठ बाजार में दशलक्षण पर्व के शुभ अवसर पर भव्य आयोजन किया गया। सांगानेर से पधारे विद्वान रोहित जैन शास्त्री के सानिध्य में संगीत की मधुर ध्वनि के साथ कार्यक्रम संपन्न हुए। प्रातःकाल से मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-अर्चना और तत्त्वार्थ सूत्र विधान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

इस दौरान रोहित जैन शास्त्री ने उत्तम मार्दव धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। शाम 7 बजे आरती के बाद महिला जैन समाज द्वारा धार्मिक तंबोला का आयोजन किया गया, जिसका संचालन रेणूका जैन और बबीता जैन ने किया। सही उत्तर देने वाले श्रद्धालुओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन (Hapur)

रोहित जैन शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद मास की शुक्ल छठ को दिगंबर जैन समाज का पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म को समर्पित है। उन्होंने कहा, “धन, दौलत, शान और शौकत अक्सर इंसान को अहंकारी और अभिमानी बना देता है, जिससे वह दूसरों को छोटा और खुद को सर्वोच्च मानने लगता है। ये नाशवंत चीजें एक दिन छूट जाती हैं। इसलिए अभिमान और परिग्रह को त्यागकर विनम्रता अपनानी चाहिए। सभी जीवों को जीवन का अधिकार है, और हमें सबके प्रति विनम्र भाव से व्यवहार करना चाहिए।”

Hapur-
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आयोजन की विशेषताएं (Hapur)

  • सुबह के कार्यक्रम: अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-अर्चना, और तत्त्वार्थ सूत्र विधान।
  • शाम का आयोजन: 7 बजे आरती, इसके बाद धार्मिक तंबोला।
  • महिला जैन समाज की भूमिका: रेणूका जैन और बबीता जैन ने तंबोला का संचालन किया।
  • पुरस्कार वितरण: धार्मिक प्रश्नों के सही उत्तर देने वालों को सम्मानित किया गया।

उपस्थित गणमान्य (Hapur)

कार्यक्रम में जैन समाज के प्रधान अनिल जैन, अशोक जैन, आकाश जैन, विकास जैन, तुषार जैन, सुरेश जैन, अंकित जैन, नमन जैन, राजेश जैन, अंकुर जैन, मेघा जैन, वंदना जैन, नेहा जैन, श्वेता जैन, प्रतिभा जैन, स्तुति जैन सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।

दशलक्षण पर्व का महत्व (Hapur)

दशलक्षण पर्व जैन धर्म का एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्व है, जो आत्मा की शुद्धि और मोक्ष मार्ग की साधना पर केंद्रित है। यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक 10 दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन्य, और ब्रह्मचर्य जैसे दस धर्मों की पूजा की जाती है।

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