हापुड़ (khabarwala24 News)। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M), भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) और भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU) ने हापुड़ जिले में देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संगठनों की कॉल पर होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पूरा समर्थन किया है। इस मौके पर उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति को जिलाधिकारी हापुड़ के जरिए एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में श्रमिकों, कर्मचारियों, किसानों, युवाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जनविरोधी नीतियों का कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। संगठनों ने श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण और रोजगार के कम होते अवसरों को लेकर चिंता जताई।
लीडर्स के बयान: सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी
सीपीआई(एम) और डीवाईएफआई के सचिव कॉमरेड कुणाल ने प्रेस बयान में कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं। सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण हो रहा है और रोजगार के मौके खत्म हो रहे हैं। उन्होंने चारों श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें फौरन रद्द करने की मांग की। वहीं, सीआईटीयू के नेता कॉमरेड हसरत अली ने बिजली विधेयक 2026, बीज विधेयक 2026 और स्मार्ट मीटर जैसी योजनाओं को आम जनता पर बोझ डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, बिजली और सार्वजनिक संस्थाओं का निजीकरण लोगों के हितों के खिलाफ है।

ज्ञापन की प्रमुख मांगें: जनहित में बदलाव की गुहार
ज्ञापन में कई अहम मांगें उठाई गईं। इनमें चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) रद्द करना, बिजली विधेयक 2026 और बीज विधेयक 2026 को वापस लेना शामिल है। इसके अलावा, रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने, शिक्षा और सार्वजनिक संस्थाओं के निजीकरण पर रोक लगाने और मनरेगा को पूरी तरह बहाल करने की अपील की गई। संगठनों का मानना है कि ये कदम आम लोगों की जिंदगी आसान बनाएंगे और आर्थिक असमानता कम करेंगे।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल: अपील हड़ताल सफल बनाने की
इस मौके पर कॉमरेड मुकुल, मनोज, मोहित, कंचन, पुनीत शर्मा (LIC), नानक चंद, गौरव कुमार, सुरेंद्र त्यागी, ऋषिपाल, गोपाल, अरमान और नमन जैसे लोग मौजूद रहे। नेताओं ने आम जनता, मजदूरों, कर्मचारियों और युवाओं से राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ये हड़ताल जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुटता दिखाने का मौका है। हापुड़ जैसे छोटे जिलों में भी ऐसे विरोध से बड़ा संदेश जा सकता है।
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