Khabarwala 24 News New Delhi : Suicide Incident आईआईटी कानपुर में बीते एक महीने में तीन छात्रों की कथित आत्महत्या की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ताजा मामला गुरुवार का है, जहां पीएचडी की छात्रा ने हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्यहत्या कर ली।
मृतक छात्रा ने बीते 29 दिसंबर 2023 को संस्थान में दाखिला लिया था। यह घटना न सिर्फ शिक्षा जगत के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हमें यह समझने की जरूरत है कि ऐसे प्रतिभाशाली और होनहार युवा इतना बड़ा कदम क्यों उठा लेते हैं और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं।
छात्रों की आत्महत्या के प्रमुख कारण (Suicide Incident)
अत्याधिक दबाव (Suicide Incident)
आईआईटी जैसे संस्थानों में प्रवेश पाना ही एक बड़ी उपलब्धि होती है। इसके बाद लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव, प्रतियोगी माहौल और परीक्षा का तनाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
अकेलापन (Suicide Incident)
हो सकता है कि नए परिवेश में घुलने-मिलने में कठिनाई, दोस्ती न बन पाना और परिवार व मित्रों से दूरी के कारण छात्र अकेलापन महसूस करें. यह इमोशनल अलगाव उन्हें हताश कर सकता है।
असफलता (Suicide Incident)
कुछ छात्रों को लगता है कि वे संस्थान की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाएंगे या परीक्षा में असफल हो जाएंगे। यह डर और चिंता उनके आत्मविश्वास को कम कर सकती है और हताशा का कारण बन सकती है।
इस समस्या से निपटने के उपाय (Suicide Incident)
जागरूकता कार्यक्रम (Suicide Incident)
संस्थानों को मेंटल हेल्थ के प्रति जागरुकता बढ़ाने के कार्यक्रम चलाने चाहिए। छात्रों को समझाएं कि मेंटल हेल्थ शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और इसकी समस्या उतनी ही आम है। संस्थानों में आसानी से उपलब्ध और सुलभ परामर्श सेवाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पॉजिटिव दृष्टिकोण (Suicide Incident)
एक्सपर्ट काउंसलरों की नियुक्ति से छात्र अपनी समस्याओं को शेयर करने में अधिक सरल महसूस करेंगे। शिक्षकों, सहपाठियों और पैरेंट्स को माहौल ऐसा बनाना चाहिए। जहां छात्र बिना किसी डर के अपनी परेशानी बता सकें और उन्हें सिंपैथी व सपोर्ट मिले। अध्ययन के प्रति पॉजिटिव दृष्टिकोण विकसित करने की जरूरत है।
सामाजिक मानसिकता (Suicide Incident)
अकादमिक सफलता को ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य न मानते हुए अन्य रुचियों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं को छिपाने की बजाय उन्हें उसी तरह स्वीकार करने और समाधान ढूंढने की सामाजिक मानसिकता बनाना जरूरी है।


