NDA Khabarwala24 News New Delhi: आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गत 18 जुलाई का दिन काफी महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ दक्षिण में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कांग्रेस और उसकी सहयोगी व समान विचारधारा वाले 26 दलों की बैठक हुई। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीजेपी की अगुवाई में NDA के 38 दलों की बड़ी बैठक हुई। इन दोनों बैठकों में 9 बड़ी सियासी पार्टियों ने अपने आप को दूर रखा।
जिन दलों ने सत्ताधारी NDA गठबंधन और उसके खिलाफ विपक्ष के बने नए INDIA गठबंधन से खुद को अलग रखा, उनमें मायावती की बहुजन समाज पार्टी , पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल, तेलंगाना की सत्ताधारी और के चंद्रशेखर राव की पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति, आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ्रAIMIM, पंजाब की शिरोमणि अकाली दल, हरियाणा की इंडियन नेशनल लोकदल और असम की AIUDF शामिल है। आपको बता दें कि मौजूदा 17 वीं लोकसभा में इन सभी दलों के कुल 59 सांसद हैं, जो कुल सांसदों का 11 प्रतिशत है। 2019 के चुनावों में इन दलों को मिलाकर कुल 10.71 प्रतिशत वोट मिले थे।
बहुजन समाज पार्टी (BSP)
उत्तर प्रदेश में अपना बड़ा जनाधार रखने वाली बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अभी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं हैं। यूपी के अलावा सटे राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी बसपा का कुछ इलाकों के मतदाताओं पर बड़ा प्रभाव रहा है। दलित और मुस्लिम मतदाताओं पर मायावती की पकड़ मजबूत मानी जाती है। 2019 में मायावती ने अखिलेश यादव के साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। तब बसपा को 10 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और उसके खाते में कुल 3.62 प्रतिशत वोट आए थे। मौजूदा परिस्थितियों में अगर मायावती किसी भी गठबंधन से समझौता करती हैं तो उसे इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।
बीजू जनता दल
NDAके पुराने साथी रहे और कई मौकों पर एनडीए से बाहर रहकर भाजपा के संकटमोचक बनने वाले नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल ने भी फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस पार्टी का ओडिशा में बड़ा जनाधार है। मौजूदा लोकसभा में उसके 12 सांसद हैं। ओडिशा से कुल 21 सांसद चुनकर आते हैं। 2014 में बीजेडी ने 20 सीटों पर कब्जा किया था। उसे दोनों चुनावों में करीब 1.7 प्रतिशथ मत मिले थे और उस राज्य के विधानसभा चुनाव में 45 प्रतिशथ मत मिले थे।
भारत राष्ट्र समिति
तेलंगाना की सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव लंबे समय से गैर कांग्रेसी-गैर भाजपाई गठबंधन की पैरवी त करते रहे हैं। उन्होंने दोनों गठबंधनों से समान दूरी बनाकर रखी है और आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव अपने बलबूते लड़ने का ऐलान किया है। मौजूदा समय में उसके 9 लोकसभा सांसद हैं। 2019 में बीआरएस (तब टीआरएस थी) को 1.25 फीसदी वोट मिले थे।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP)
आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी YSRCP के मुखिया जगनमोहन रेड्डी ने भी आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं लेकिन बीजेपी से उसकी नजदीकियां बढ़ रही हैं। फिलहाल लोकसभा में उसके 22 सांसद हैं और 2019 में उसे 2053 फीसदी वोट मिले थे। आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना में भी इस दल का प्रभाव माना जाता है।
जनता दल सेक्युलर
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस कभी कांग्रेस के साथ तो कभी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना चुकी है। इस बार भी वह बीजेपी की तरफ टकटकी लगाए हुए है लेकिन मंगलवार को हुई एनडीए की बैठक में शामिल होने का उसे न्योता नहीं मिल सका। अब पार्टी ने कहा है कि वह अकेली चलेगी लेकिन संभावना है कि लोकसभा चुनाव आते-आते उसकी बीजेपी से दोस्ती हो जाए। फिलहाल लोकसभा में उसके एकमात्र सांसद हैं। 2019 में कांग्रेस के साथ मिलकर जेडीएस ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसे 0.56 फीसदी ही वोट हासिल हुए थे।

शिरोमणि अकाली दल और INLD
बीजेपी की पुरानी सहयोगी पार्टी और पंजाब में लंबे समय तक शासन करने वाली शिरोमणि अकाली दल की फिर से बीजेपी से नजदीकियां बढ़ रही हैं लेकिन फिलहाल वह एनडीए गठबंधन में शामिल नहीं हुई है। 2020 में किसानों के मुद्दे पर SAD ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था और केंद्र में मंत्री पद से हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया था। मौजूदा लोकसभा में उसके दो सांसद हैं। 2019 में उसे कुल 0.62 फीसदी वोट मिले थे।
इंडियन लोकदल
हरियाणा की इंडियन लोकदल भी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं है। फिलहाल लोकसभा में उसके एक भी सांसद नहीं है। 2019 में उसे सिर्फ 0.04 प्रतिशत वोट ही मिले थे लेकिन हाल के दिनों में पार्टी का वर्चस्व फिर से हरियाणा में बढ़ने लगा है।
AIMIM और AIUDF
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी को भी इंतजार था कि 26 दलों के विपक्षी कुनबे में उसे शामिल होने का न्योता मिलेगा लेकिन उन्हें भी निराशा हाथ लगी है। पार्टी का तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में जनाधार माना जाता है। फिलहाल लोकसभा में उसके दो सांसद हैं। 2019 में उसे 0.20 फीसदी वोट मिले थे।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के भी विपक्षी दल वाले गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद थी लेकिन फिलहाल पार्टी ने खुद को अलग रखा है। पार्टी पहले भी कांग्रेस के साथ गठबंधन में रह चुकी है। फिलहाल लोकसभा में उसके एकमात्र सांसद हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में उसे 0.23 फीसदी वोट मिले थे।



