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टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के बयान पर मंदिर के पुजारी बोले, सबकी अपनी-अपनी आस्था

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अहमदाबाद, 10 मार्च (khabarwala24)। वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने को लेकर पूर्व क्रिकेटर व टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद भड़क गए हैं। वहीं, मंदिर पुजारी के पुजारी ईश्वरदास त्यागी ने khabarwala24 से बात करते हुए कहा कि संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं। एक होते हैं आस्तिक और दूसरे होते हैं नास्तिक। जिनका प्रभु में विश्वास नहीं है, वे लोग तो ऐसी बातें करेंगे ही। जो आस्तिक होते हैं, वो प्रभु से प्रेम करते हैं।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले जय शाह दर्शन करने आए थे। आश्रम और स्टेडियम का एक ही प्रांगण है। जब भी बड़े मुकाबले होते हैं तो कोई न कोई खिलाड़ी दर्शन करने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जब फाइनल मुकाबले से पहले जय शाह और खिलाड़ी दर्शन करने आए। शायद उनके मन में भाव रहा होगा कि अच्छी तरह खेलूं और टीम को जीत दिला सकूं। यही सोच रही होगी इसलिए दर्शन करने आए।

पुजारी ने कहा कि फाइनल मैच जीतने के बाद जय शाह, कोच गौतम गंभीर, कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ कुछ और लोग दर्शन करने आए। सभी लोगों का स्वागत किया गया और टीम इंडिया के वर्ल्ड चैंपियन बनने पर खुशी मनाई गई।

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उन्होंने कहा कि जब भी यहां मैच होता है तो जिन खिलाड़ियों में श्रद्धा होती है वे यहां प्रार्थना करने आते हैं। दुनिया कुछ न कुछ कहती रहती है। हार जाते तो कहते देखो हनुमान जी से प्रार्थना की और हार गए और जब जीत गए तो कुछ लोगों ने कहा कि देखो हनुमान जी ने मैच जिता दिया। अपनी-अपनी आस्था और सोच की बात है।

बता दें कि टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने khabarwala24 से बातचीत में कहा कि आप टीम के लिए खेलते हैं। देश में सभी धर्म के लोग रहते हैं। सभी उस टीम का हिस्सा हैं। 1983 में जब हम विश्व कप जीते थे, तब भी सभी धर्म के खिलाड़ी टीम में सामिल थे। खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं बल्कि वो अपनी टीम के लिए खेलते हैं। इन लोगों ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है। उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम पूरे हिंदुस्तान की टीम है।

आजाद ने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर कहा कि फिर भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया। उन्होंने कहा कि मैं खुद हिन्दू हूं लेकिन खेलते वक्त कभी धर्म को नहीं जोड़ा। खेल का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया। हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था। उन्होंने कहा, “हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था।”

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