नई दिल्ली, 25 जनवरी (khabarwala24)। सृष्टि को बचाने के लिए मां जगदम्बा ने कई रूप धारण किए हैं और उनके हर अवतार की अलग कहानी और आध्यात्मिकता है। आंध्र प्रदेश में मां जगदम्बा के कई मंदिर हैं, जहां वे भगवान शिव के साथ पार्वती के रूप में विराजमान हैं, लेकिन 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रभावशाली ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव अकेले विराजमान नहीं हैं, बल्कि शक्ति के रूप में मां पार्वती भी मौजूद हैं।
यह देश का पहला ज्योतिर्लिंग है, जहां सृष्टि के संहारकर्ता और प्रकृति की देवी एक साथ विराजमान हैं। हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नल्लामल्ला पहाड़ियों पर भगवान शिव और मां पार्वती के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम भ्रामराम्बिका (भ्रामरांबा) मल्लिकार्जुन की।
देश के हर कोने से भक्त भगवान शिव के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। इसी मंदिर के परिसर में मां पार्वती अलग रूप में विराजमान हैं, जहां उनकी आठ भुजाएं हैं। मंदिर परिसर के पीछे की तरफ सर्वशक्ति मां श्री शैलम भ्रामरांबा देवी के रूप में स्थापित हैं। ये मंदिर भारत के 18 शक्ति पीठों में से एक है, जहां मां ने मधुमक्खी का अवतार लेकर राक्षस का वध किया था।
भ्रामराम्बिका देवी मंदिर मां भ्रामरांबा को समर्पित है, जो देवी पार्वती का ही एक रूप हैं। देवी भगवान शिव के अवतार भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी की पत्नी हैं। इस मंदिर में देवी की पूजा ब्राह्मणी शक्ति के रूप में की जाती है। यहां माता को रेशमी साड़ी अर्पित की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में संत अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा की प्रतिमा है। गर्भगृह के सामने एक श्री यंत्र स्थापित है। भ्रामरांबा शब्द का अर्थ है “मधुमक्खियों की माता।” पौराणिक कथा के अनुसार, देवी भ्रामरांबा ने राक्षस अरुणासुर का वध करने के लिए आठ पैरों वाली मधुमक्खी का अवतार लिया था।
अरुणासुर नामक एक राक्षस भगवान ब्रह्मा का परम भक्त था। उसकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने उसे ऐसा वरदान दिया कि कोई भी दो या चार पैरों वाला प्राणी उसे मार नहीं सकता था। अहंकार से भरे राक्षस ने धरती पर उत्पाद मचाना शुरू कर दिया और देवलोक पर भी कब्जा कर लिया। अब घबराए देवता मां पार्वती के पास पहुंचे। राक्षस का वध करने के लिए मां ने मधुमक्खी का अवतार लिया और उसका वध कर शांति कायम की।
श्रीशैलम भ्रामराम्बिका मंदिर की वास्तुकला भी उत्कृष्ट है। गोपुरम पर भगवान गणेश की प्रतिमा बनी है और मंदिर परिसर में भी कई छोटे-छोटे उप मंदिर बने हैं। मंदिर परिसर में नंदीमंडप, वीरशिरोमंडप, मल्लिकार्जुन मंदिर, सहस्र लिंगेश्वर, अर्धनारीश्वर, वीरभद्र, उमा महेश्वर और नवब्रह्म मंदिर स्थापित हैं। कहा जाता है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर बने भगवान गणेश दर्शन करने आए भक्तों के पाप और पुण्यों का लेखा-जोखा रखते हैं।
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