मां कटक चंडी मंदिर: यहां मंदिर में सजीव रूप में विराजमान हैं मां काली, देती हैं भय से मुक्ति

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नई दिल्ली, 28 जनवरी (khabarwala24)। ओडिशा में मां काली को समर्पित कई प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर स्थित हैं, लेकिन जब बात भय से मुक्ति और विजय की आती है तो भक्त शक्तिपीठों में शामिल कटक चंडी मंदिर का रुख करते हैं।

न सिर्फ कटक चंडी मंदिर, बल्कि मंदिर में मौजूद मां की प्रतिमा भी बहुत प्राचीन है। मंदिर हिंदुओं के लिए आस्था और आध्यात्म की शक्ति का केंद्र है, जहां भक्त हर मुश्किल समय में मां की अराधना करने पहुंचते हैं।

ओडिशा के कटक में अधिष्ठात्री देवी चंडी को समर्पित प्राचीन कटक चंडी मंदिर है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में मां काली की विशेष पूजा होती है, जिसका उत्सव 11 दिनों तक चलता है। भक्तों का मंदिर और मां की प्रतिमा को लेकर अनोखा विश्वास है। भक्तों का मानना है कि मां की प्रतिमा स्वयंभू है और उसका इतिहास मंदिर से भी ज्यादा पुराना है। यही वजह है कि मां पर भक्तों का अटूट विश्वास है। मंदिर के गर्भगृह में मौजूद मां की प्रतिमा भी अद्भुत है, जिनके चार हाथों में अलग-अलग अस्त्र मौजूद हैं। मां को पाप नाशिनी, भय नाशिनी और मन-मांगा वर देने वाली कहा जाता है।

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मां कटक चंडी मंदिर महानदी नदी के तट के निकट स्थित है और दुर्गा पूजा एवं काली पूजा उत्सवों के लिए प्रसिद्ध है। दुर्गा पूजा उत्सव मां कटक चंडी मंदिर में प्रमुखता से मनाया जाता है, जो अश्विन कृष्ण अष्टमी के कृष्ण पक्ष से शुरू होकर अश्विन शुक्ल नवमी और विजयदशमी तक 16 दिनों तक चलता है। दशहरा पूजा के दौरान मां चंडी की पूजा दुर्गा के विभिन्न अवतारों के रूप में की जाती है। कटक में लोग मां कटक चंडी को ‘जीवित देवी’ के रूप में दृढ़ता से मानते हैं।

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा की बात करें तो बताया जाता है कि महानदी नदी के पास होने के बाद भी पहले जमीन बंजर हुआ करती थी। हजारों साल पहले कनिका के राजा के पुरोहित रहे स्वर्गीय हंस पांडा वहां मवेशी और भेड़ें चराने जाते थे। एक दिन थककर वहीं जमीन पर आराम करने लगे तभी स्वप्न में मां काली ने उन्हें दर्शन देकर जमीन से बाहर निकालने का अनुरोध किया।

कहा जाता है कि स्वप्न में जहां खुदाई का आदेश दिया, वहां से मां काली की चार भुजाओं वाली प्रतिमा मिली थी, जिसकी स्थापना नदी किनारे वहीं की गई है, जहां आज मां काली का कटक मंदिर स्थापित है। ऐसा कहा और माना जाता है कि खुदाई के दौरान सबसे पहले लगभग चालीस बैलगाड़ियों जितना लाल सिंदूर निकला और फिर मां चंडी की मूर्ति प्रकट हुई। यही कारण है कि मां की प्रतिमा को सजीव प्रतिमा माना जाता है और भक्त भय से मुक्ति पाने के लिए मां के दर पर आते हैं।

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