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भारत के एलएनजी आयात का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है: रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 6 मार्च (khabarwala24)। भारत के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात का बड़ा हिस्सा अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2025 में भारत के कुल एलएनजी आयात का करीब 69 प्रतिशत हिस्सा, यानी लगभग 17.5 मिलियन टन (63 एमएमएससीएमडी), कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर या उसके आसपास के रास्ते से गुजरता है। शुक्रवार को जारी ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल के विश्लेषकों ने रिपोर्ट में कहा है कि यदि गेल के अमेरिकी एलएनजी स्वैप वॉल्यूम को समायोजित भी कर दिया जाए, तब भी भारत की प्रभावी निर्भरता लगभग 66 प्रतिशत रहती है। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र पर भारत की निर्भरता काफी अधिक है और इससे आपूर्ति से जुड़ा जोखिम बना रहता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका असर पूरे गैस सेक्टर पर क्रमिक रूप से पड़ सकता है। इसका प्रभाव एलएनजी टर्मिनलों के उपयोग, गैस ट्रांसमिशन और औद्योगिक क्षेत्रों के मुनाफे तक देखा जा सकता है।

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टर्मिनल स्तर पर सबसे ज्यादा जोखिम पेट्रोनेट एलएनजी के दहेज टर्मिनल पर देखा गया है। इस टर्मिनल ने वर्ष 2025 में लगभग 14.8 मिलियन टन एलएनजी संभाला, जिसमें से 76 प्रतिशत गैस होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आई थी।

इसके अलावा, छोटे टर्मिनल जैसे कोच्चि और छारा पूरी तरह मध्य पूर्व से आने वाली गैस पर निर्भर हैं। वहीं, मुंद्रा (88 प्रतिशत), धामरा (65 प्रतिशत) और एनोर (62 प्रतिशत) टर्मिनल भी इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं, जिससे इन पर जोखिम अधिक है।

हालांकि हजीरा (25 प्रतिशत) और दाभोल (0 प्रतिशत) टर्मिनल को कुछ राहत है, क्योंकि यहां आने वाली एलएनजी मुख्य रूप से अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से आती है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति में झटके का सबसे ज्यादा असर पेट्रोनेट एलएनजी (पीएलएनजी) और गुजरात स्टेट पेट्रोनेट पर पड़ सकता है।

पीएलएनजी की लगभग 77 प्रतिशत निर्भरता होर्मुज मार्ग पर है, जिससे उसकी रीगैसिफिकेशन (गैस बनाने की प्रक्रिया) से होने वाली आय सीधे प्रभावित हो सकती है। कंपनी ने कतर के रास लाफान प्लांट में आई बाधा का हवाला देते हुए गेल, आईओसीएल और बीपीसीएल को फोर्स मेज्योर नोटिस भी जारी किया है।

वहीं, गुजरात स्टेट पेट्रोनेट (जीयूजेएस) की वर्ष 2025 की ट्रांसमिशन मात्रा का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग पर निर्भर है, जिससे इस कंपनी पर भी समान जोखिम बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात गैस लिमिटेड (जीजीएल) भी मार्जिन और वॉल्यूम दोनों स्तरों पर प्रभावित हो सकती है। कंपनी की कुल गैस आपूर्ति का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा एलएनजी से आता है, जो मुख्य रूप से मोरबी के औद्योगिक क्लस्टर को सप्लाई किया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जीजीएल की 48 प्रतिशत निर्भरता होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, इसलिए स्पॉट मार्केट में एलएनजी की कीमतें बढ़ने से कंपनी की प्रतिस्पर्धा प्रोपेन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के मुकाबले कम हो सकती है।

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, कंपनी ने औद्योगिक ग्राहकों को फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है और 6 मार्च 2026 से गैस आपूर्ति कम करने का फैसला लिया है। साथ ही औद्योगिक ग्राहकों के लिए डेली कॉन्ट्रैक्टेड क्वांटिटी (डीसीक्यू) भी घटाई जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गेल का मार्केटिंग सेगमेंट सबसे मजबूत स्थिति में है, क्योंकि इसकी होर्मुज मार्ग पर निर्भरता केवल 16 प्रतिशत है।

कंपनी के पास अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से विविध गैस आपूर्ति अनुबंध हैं, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। ब्रोकरेज के अनुसार, वास्तविक निर्भरता लगभग 30 प्रतिशत के आसपास आंकी गई है।

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