लखनऊ, 21 जनवरी (khabarwala24)। लोकतंत्र की आत्मा विधायिका में निहित है और यहीं से न्याय, समता व संप्रभुता का मार्ग तय होता है। 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बात कहते हुए सम्मेलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं को नई दिशा देने वाला बताया।
तीन दिन तक चले इस सम्मेलन में देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों के अनुभव, संवाद और मंथन के बाद ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को लेकर छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के माध्यम से पिछले तीन दिनों में देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों, विधायी कार्यों से जुड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को नई ऊंचाई देने का कार्य किया है। वास्तव में न्याय कैसे प्राप्त होगा, यह विधायिका के माध्यम से ही तय होता है। सरकार की योजनाएं कैसे क्षमता-आधारित समाज के निर्माण में योगदान दें, इसका मंच भी विधायिका ही है। संप्रभुता का सशक्त उदाहरण विधायिका प्रस्तुत करती है, जहां सहमति और असहमति के बीच सार्थक संवाद देखने को मिलता है। यह भारत का सौभाग्य है कि यहां लोकतंत्र की सर्वोच्च व्यवस्था लागू है। इस आयोजन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, वहीं मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश सहित देश के नागरिकों को भी इन गतिविधियों को जानने-सुनने का अवसर मिला है। उन्होंने सभी पीठासीन अधिकारियों, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा उपसभापति और आयोजन को सफल बनाने वाले अधिकारियों का उत्तर प्रदेश की ओर से हार्दिक अभिनंदन किया।
सीएम योगी ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री बार-बार लोकतंत्र की जननी बताते हैं। भले ही त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था औपचारिक रूप से बाद में लागू हुई हो, लेकिन गांवों में पंच-परंपरा सदियों पुरानी रही है। देश में भले ही रंग, रूप, खानपान और वेशभूषा अलग-अलग हों, लेकिन उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत एक भाव और एक आस्था से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने अपने संसदीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें पांच बार लोकसभा जाने का अवसर मिला, जहां से उन्होंने सीखा कि नियमों और परंपराओं के अंतर्गत सदन संचालन को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि संसद के मॉडल को अपनाते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल में सुधार किया गया, जिससे अब 20 प्रश्नों पर 20 सदस्य अपनी बात रख पा रहे हैं, जबकि पहले केवल दो-तीन सदस्य ही बोल पाते थे। सीएम योगी ने कहा कि अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज भी विधायिका में उसके प्रतिनिधित्व के माध्यम से सुनी जाती है। उन्हें प्रसन्नता है कि इस सम्मेलन में भी ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ पर हुई बहस में 377 विधायकों ने भाग लिया और रात भर सदन में उपस्थित रहकर अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस विजन डॉक्यूमेंट की तैयारी में 500 जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ 500 से अधिक बुद्धिजीवियों-सेवानिवृत्त मुख्य सचिव, कुलपति, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को जोड़ा गया। इन्हें 75 जिलों में जाकर समाज के हर वर्ग से संवाद करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके परिणामस्वरूप 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिन्हें आईआईटी कानपुर के सहयोग से अंतिम रूप देकर विजन डॉक्यूमेंट का हिस्सा बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद में पेपरलेस बजट और पूरी तरह डिजिटल प्रणाली लागू की जा चुकी है, जिससे कागज की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला है। टेक्नोलॉजी के इस युग में जनप्रतिनिधियों को अपडेट रखने और उन्हें प्रशिक्षण देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साल में कम से कम 30 दिन सदन चलना चाहिए। यह प्रेरणा केवल संसद और विधानसभाओं के लिए नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों के लिए भी है। उत्तर प्रदेश में सदन बिना लंच अवकाश के सुबह 11 बजे से देर रात तक चलता है, जिससे अधिकतम विधायी कार्य संभव हो पाता है।
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में देश की ज्वलंत समस्याओं पर लगातार चर्चा होती है। मंत्री स्तर और अधिकारी स्तर पर समितियां गठित कर समाधान की दिशा में कार्य किया जाता है। संविधान दिवस सहित अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष चर्चाएं की जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन एक-दूसरे से सीखने और श्रेष्ठ अनुभव अपनाने का प्रभावी मंच है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सम्मेलन में पारित सभी छह संकल्पों को उत्तर प्रदेश में पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाएगा।
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