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Valley of Flowers Uttrakhand 1 जून से घूमने के लिए खुल रही उत्तराखंड की ये घाटी, हर 15 दिन में बदलती है रंग

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Khabarwala 24 News New Delhi : Valley of Flowers Uttrakhand उत्तराखंड में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक स्पॉट है, लेकिन यहां की कुछ जगह इतनी खास हैं कि उन्हें देखकर आंखों पर यकीन करना वाकई मुश्किल होता है। ऐसी ही एक जगह है ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ यानी ‘फूलों की घाटी’।

नेचर्स लवर्स के लिए ये जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है, वहीं जो लोग ट्रेकिंग के शौकीन हैं उनके लिए भी ये एक इंट्रेस्टिंग प्लेस है। हर साल 1 जून से ये घाटी पर्यटकों के लिए खोल दी जाती है और अक्टूबर के अंत तक खुली रहती है। चलिए जानते हैं इस खूबसूरत घाटी से जुड़ी कुछ खास बातें, साथ ही जानेंगे यहां पहुंचने की पूरी ट्रैवल गाइड…

चमोली जिले में स्थित है फूलों की घाटी? (Valley of Flowers Uttrakhand)

वैली ऑफ फ्लावर्स यानी फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी नेशनल पार्क के पास स्थित है। समुद्र तल से करीब 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी लगभग 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। इसमें 500 से भी ज्यादा किस्मों के फूल पाए जाते हैं। खास बात है कि इन फूलों में कई विदेशी प्रजातियाँ भी शामिल हैं। इस घाटी का नाम विश्व धरोहर स्थल की लिस्ट में शामिल किया गया है। हर साल दुनिया भर से हजारों लाखों पर्यटक इस घाटी में घूमने के लिए आते हैं।

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कैसे हुई खूबसूरत फूलों की घाटी की खोज (Valley of Flowers Uttrakhand)

उत्तराखंड के चमोली में स्थित ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ घाटी की खोज सन 1932 में वनस्पति शास्त्री फ्रैंक सिडनी स्माइथ ने की थी। इसके बाद सन 1937 में वे इस घाटी पर आ कर, कई दिनों तक रुके और उन्होंने इस पर ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ नाम की एक किताब भी लिखी। अपनी किताब में उन्होंने इस घाटी से जुड़ी कई दिलचस्प बातों का जिक्र किया। अपनी किताब में उन्होंने यह भी लिखा है कि ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ घाटी पर मौजूद फूलों का रंग हर 15 दिन में बदलता रहता है।

कैसे पहुंचे वैली ऑफ फ्लावर्स घाटी? (Valley of Flowers Uttrakhand)

‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ घाटी हर साल सिर्फ 4 महीने के लिए खोली जाती है। 1 जून से लेकर, लास्ट अक्टूबर तक पर्यटक इस खूबसूरत घाटी पर भ्रमण के लिए जा सकते हैं। सबसे पहले ऋषिकेश या हरिद्वार पहुंचना होगा। फिर सड़क मार्ग के द्वारा जोशीमठ पहुंचे और फिर यहां से गोविंदघाट। लगभग 3 किलोमीटर पर स्थित पुलना पहुंचे। यहाँ से लगभग 11 किलोमीटर तक ट्रैकिंग करते हुए घांघरिया तक जाना होता है। घांघरिया से ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है।

घूमने से पहले रखें इन बातों का ध्यान (Valley of Flowers Uttrakhand)

शायद यही वजह है कि इस घाटी को जादुई घाटी का भी नाम दिया गया है। इस बात का ध्यान रखें कि ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ के आसपास कोई दुकान आदि मौजूद नहीं है। ऐसे में अपनी जरूरत का सामान जैसे खाने पीने की चीजें या पानी आदि बेस कैंप घांघरिया से ही लेकर जाएं। इसके अलावा यहां पर ट्रैवल के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। इंडियन टूरिस्ट के लिए इसकी फीस 150 रुपए है, जबकि फॉरेनर टूरिस्ट के लिए ये फीस 600 रुपए है।

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Sandeep Kumar
Sandeep Kumarhttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sandeep Kumar है। मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर हूं और पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। अभी मैं Khabarwala24 News में कई अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थ, ट्रैवल, एजुकेशन और ऑटोमोबाइल्स पर कंटेंट लिख रहा हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने शब्दों के ज़रिए लोगों को सही, सटीक और दिलचस्प जानकारी दे सकूं।

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