नई दिल्ली, 30 अगस्त (khabarwala24)। एक स्टडी में पाया गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की थोड़ी सी मात्रा भी पुरुषों में वजन बढ़ने, हार्मोन में गड़बड़ी और स्पर्म की गुणवत्ता खराब होने का कारण बन सकती है।
वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने अब यह पता लगाया है कि कम से कम प्रोसेस्ड फूड की तुलना में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड लेने पर लोगों का वजन अधिक बढ़ता है, भले ही उनकी कैलोरी की मात्रा एक समान हो।
सेल मेटाबॉलिज्म पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से भरपूर आहार में प्रदूषकों का स्तर अधिक होता है, जो मनुष्यों में स्पर्म की गुणवत्ता को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं।
कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के एनएनएफ सेंटर फॉर बेसिक मेटाबोलिक रिसर्च (सीबीएमआर) की प्रमुख लेखिका जेसिका प्रेस्टन ने कहा, हमारे परिणाम साबित करते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स हमारे रिप्रोडक्टिव और मेटाबॉलिक हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं, भले ही उन्हें अधिक मात्रा में न खाया जाए। इससे पता चलता है कि इन खाद्य पदार्थों की प्रोसेस्ड प्रकृति ही उन्हें हानिकारक बनाती है।
सर्वोत्तम आंकड़े प्राप्त करने के लिए, टीम ने एक ही व्यक्ति पर अनप्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड आहार के स्वास्थ्य प्रभाव की तुलना की। उन्होंने 20 से 35 वर्ष की आयु के 43 पुरुषों को शामिल किया, जिन्होंने दोनों आहारों में से प्रत्येक पर तीन सप्ताह बिताए और बीच में तीन महीने का वॉशआउट रहा।
आधे पुरुषों ने अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और आधे ने अनप्रोसेस्ड फूड लेना शुरू किया। आधे पुरुषों को अतिरिक्त 500 डेली कैलोरी वाला हाई-कैलोरी आहार भी दिया गया, जबकि आधे पुरुषों को उनके आकार, उम्र और शारीरिक गतिविधि के स्तर के अनुसार सामान्य मात्रा में कैलोरी दी गई। साथ ही उन्हें यह नहीं बताया गया कि वे किस आहार पर हैं।
अनप्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड दोनों फूड में कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा की मात्रा समान थी।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड आहार लेने के दौरान अनप्रोसेस्ड फूड की तुलना में पुरुषों में एक किलोग्राम अधिक वसा का बढ़ना पाया गया। दिल के स्वास्थ्य से जुड़े कई अन्य संकेतक भी प्रभावित हुए।
वैज्ञानिकों ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड लेने वाले पुरुषों में हार्मोन को बिगाड़ने वाले थैलेट (एक ऐसा पदार्थ जिसका उपयोग प्लास्टिक में होता है) का स्तर खतरनाक तरीके से बढ़ गया था। इस डाइट पर रहने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन के स्तर में भी कमी देखी गई, जो स्पर्म प्रोडक्शन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रोमेन बैरेस ने कहा, हम यह देखकर हैरान थे कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पदार्थों से शरीर के कितने कार्य बाधित होते हैं, यहां तक कि स्वस्थ युवा पुरुषों में भी। इसके लंबे समय के परिणाम चिंताजनक हैं और लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों से बेहतर सुरक्षा के लिए पोषण संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
एससीएच/एएस
Source : IANS
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