नई दिल्ली, 30 अगस्त (khabarwala24)। केंद्र सरकार ने पारंपरिक उपायों के साथ ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट को इंटीग्रेट कर भारत के आर्थिक संकेतकों को समृद्ध बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और केरल के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) ने कोच्चि में महासागर खातों के विकास पर तटीय राज्यों की क्षमता निर्माण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की।
एमओएसपीआई के महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी) एन.के. संतोषी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ओशियन अकाउंट्स किस प्रकार हमारे समुद्री संसाधनों की गतिशीलता को उजागर कर तटीय इकोसिस्टम की सीमा, स्थिति, सेवाओं और परिसंपत्तियों पर नजर रख सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को पूरक बनाते हैं।
एमओएसपीआई के सचिव सौरभ गर्ग ने आगामी यूएन सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स (एसएनए-2025) के अनुरूप ओशियन इकोसिस्टम के आंकड़ों को नेशनल अकाउंटिंग में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो महासागरों, जल और वनों जैसी प्राकृतिक परिसंपत्तियों के लिए जवाबदेही पर जोर देता है।
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमानों में पारदर्शिता बढ़ाना, जलवायु जोखिमों के विरुद्ध नीति निर्माण को मजबूत करना और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है।
सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट, इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज, नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर और नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च के विशेषज्ञों ने मत्स्य पालन डेटा, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और ओशियन अकाउंटिंग के लिए जलवायु प्रभावों पर चर्चा की।
इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य तटीय राज्यों को अपने स्वयं के ओशियन अकाउंट्स बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे एसईईए फ्रेमवर्क के अनुसार अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के ओशियन अकाउंट्स का विकास संभव हो सकेगा।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इससे पहले 22 जनवरी, 2025 को ओशियन इकोसिस्टम अकाउंट्स इन इंडिया: ए फ्रेमवर्क रिपोर्ट भी जारी की।
यह रिपोर्ट ओशियन इकोसिस्टम पर इकोलॉजिकल और इकोनॉमिक डेटा को इंटीग्रेट करती है, जो भारत में विकास और सस्टेनेबल ओशियन मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाने वाले सूचित निर्णय लेने में मदद करती है।
ओशियन अकाउंटिंग, महासागर द्वारा समर्थित पर्यावरणीय संपत्तियों, आर्थिक गतिविधियों और तटीय आजीविका के बारे में जानकारी को व्यवस्थित रूप से ट्रैक और व्यवस्थित करने की एक विधि है। इससे सरकारों और समुदायों को समुद्री संसाधनों के संरक्षण और स्थायी उपयोग के लिए बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
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Source : IANS
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