CLOSE

‘वक्फ बाय यूजर’ पर नहीं मिली राहत, किन प्रावधानों पर लगी रोक, कौन से बरकरार? समझें सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
-Advertisement-

Khabrwala24 News: भारत की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को वक्फ कानून से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और मुस्लिम समुदाय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। वक्फ कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगाई गई है, जबकि कुछ प्रावधानों को बरकरार रखा गया है। आइए समझते हैं… कि ‘वक्फ बाय यूजर’ का क्या हुआ, किन धाराओं पर रोक लगी, और किन प्रावधानों को अदालत ने बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मुख्य बिंदु

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की धारा 3(आर), 2(सी), 3(सी), और 23 पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या को सीमित करने का फैसला लिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे वक्फ कानून पर रोक लगाने का अधिकार उसके पास नहीं है, क्योंकि यह कानून की संवैधानिकता पर सवाल नहीं उठाता। इस फैसले से मुस्लिम समुदाय को कुछ मामलों में राहत मिली है, जबकि कुछ मुद्दों पर सरकार के पक्ष को मजबूती मिली है।

वक्फ कानून क्या है?

वक्फ कानून भारत में मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है। यह कानून उन संपत्तियों को संरक्षित करता है, जो धार्मिक, शैक्षिक, या सामाजिक कार्यों के लिए दान की जाती हैं। वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों का प्रबंधन करता है और यह सुनिश्चित करता है कि इनका उपयोग सही दिशा में हो। हाल के वर्षों में वक्फ कानून में संशोधन को लेकर कई विवाद उठे हैं, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

- Advertisement -

सुप्रीम कोर्ट ने किन प्रावधानों पर लगाई रोक?

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की निम्नलिखित धाराओं पर रोक लगाई है:

1. धारा 3(आर): पांच साल की शर्त पर रोक

इस धारा के तहत यह शर्त थी कि कोई व्यक्ति वक्फ संपत्ति बनाने के लिए कम से कम पांच साल तक इस्लाम का अनुयायी होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त को मनमाना बताते हुए इस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक इस संबंध में स्पष्ट नियम नहीं बनते, यह प्रावधान लागू नहीं होगा। इस फैसले से मुस्लिम समुदाय को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि इस शर्त को लेकर उनकी आपत्ति थी।

- Advertisement -

2. धारा 2(सी): संपत्ति को वक्फ मानने की शर्त

इस धारा में कहा गया था कि जब तक नामित अधिकारी की रिपोर्ट दाखिल नहीं होती, किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान को भी स्थगित कर दिया है। इसका मतलब है कि अब कोई संपत्ति बिना आधिकारिक रिपोर्ट के भी वक्फ संपत्ति के रूप में मानी जा सकती है, बशर्ते अन्य शर्तें पूरी हों।

3. धारा 3(सी): कलेक्टर को अधिकार देने पर रोक

इस धारा के तहत जिला कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वह यह तय करे कि कोई संपत्ति वक्फ की है या सरकारी। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान को शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन माना और इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि जब तक संपत्ति के स्वामित्व का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वक्फ को उस संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा।

4. धारा 23: वक्फ बोर्ड के सीईओ का प्रावधान

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया कि वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जहां तक संभव हो, मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने गैर-मुस्लिम सीईओ की नियुक्ति पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई। यह फैसला मुस्लिम समुदाय की उस मांग को ध्यान में रखकर लिया गया, जिसमें उन्होंने वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में मुस्लिम बहुमत की बात कही थी।

वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या सीमित

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या को सीमित करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया। कोर्ट ने कहा कि:

  • केंद्रीय वक्फ परिषद: इसमें 11 सदस्यों में से अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।
  • राज्य वक्फ बोर्ड: इसमें अधिकतम 3 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं।

इस फैसले से वक्फ बोर्ड और परिषद में मुस्लिम समुदाय का बहुमत बना रहेगा, जो मुस्लिम पक्षकारों की एक बड़ी मांग थी। नए कानून में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट सीमा नहीं थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे तय कर दिया।

‘वक्फ बाय यूजर’ पर क्यों नहीं मिली राहत?

‘वक्फ बाय यूजर’ का मतलब है कि अगर कोई संपत्ति लंबे समय से वक्फ द्वारा इस्तेमाल की जा रही है, तो उसे वक्फ संपत्ति माना जा सकता है, भले ही उसके पास पूर्ण कागजी दस्तावेज न हों। पुराने वक्फ कानून में यह प्रावधान था, लेकिन नए संशोधित कानून में इस शब्द को हटा दिया गया है।

नए कानून के तहत, अगर कोई संपत्ति वक्फ की नहीं है और उसके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, तो उसे संदिग्ध माना जाएगा। मुस्लिम समुदाय ‘वक्फ बाय यूजर’ के प्रावधान को बनाए रखने के पक्ष में था और इस पर रोक लगाने की मांग कर रहा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेजों के किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।

कलेक्टर की जांच पर रोक: इसका क्या मतलब?

वक्फ कानून में एक प्रावधान था, जिसमें जिला कलेक्टर को यह जांच करने का अधिकार दिया गया था कि कोई संपत्ति सरकारी है या वक्फ की। अगर कलेक्टर को संदेह होता कि कोई जमीन सरकारी है, तो जांच पूरी होने तक उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना जाता। मुस्लिम समुदाय को इस प्रावधान पर आपत्ति थी, क्योंकि इससे वक्फ संपत्तियों पर उनका दावा कमजोर हो सकता था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि जिला कलेक्टर को यह तय करने का अधिकार देना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि जब तक संपत्ति के स्वामित्व का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वक्फ को उस संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा। यह फैसला मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ी राहत है।

वक्फ कानून पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं?

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि पूरे वक्फ कानून पर रोक लगाना केवल ‘दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) मामलों में ही संभव है। कोर्ट ने कहा कि किसी कानून की संवैधानिकता को हमेशा उसके पक्ष में माना जाता है। अदालत ने 1923 के वक्फ अधिनियम से लेकर अब तक की विधायी पृष्ठभूमि का अध्ययन किया और पाया कि पूरे कानून पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था 1923 से चली आ रही है। इसलिए, पूरे कानून को रद्द करने या उस पर रोक लगाने की बजाय, केवल उन प्रावधानों पर रोक लगाई गई, जो संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ थे।

सभी पक्षकारों ने फैसले का किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय और कानून के समर्थकों, दोनों ने सराहा है। मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि यह अंतरिम फैसला वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए राहत देने वाला है। कांग्रेस नेता और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि इस फैसले से वक्फ संपत्तियों पर कोई खतरा नहीं है।

वहीं, संशोधित कानून के समर्थक अश्विनी उपाध्याय और बरुन ठाकुर ने कहा कि ज्यादातर प्रावधान बरकरार हैं। केवल पांच साल की इस्लाम प्रैक्टिस की शर्त पर पूरी तरह रोक लगी है। इस तरह, यह फैसला दोनों पक्षों के लिए संतुलित माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वक्फ कानून को लेकर चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने धारा 3(आर), 2(सी), 3(सी), और 23 पर रोक लगाकर मुस्लिम समुदाय को राहत दी है। साथ ही, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या को सीमित करके मुस्लिम बहुमत सुनिश्चित किया है। हालांकि, ‘वक्फ बाय यूजर’ के प्रावधान को हटाने पर कोई राहत नहीं मिली, जिससे कुछ मुस्लिम पक्षकार निराश हो सकते हैं।

यह फैसला सरकार और मुस्लिम समुदाय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जब तक संपत्तियों के स्वामित्व का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वक्फ को किसी भी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा। इस तरह, सुप्रीम कोर्ट ने एक निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है, जो दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखता है।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

- Advertisement -
spot_img
Sheetal Kumar Nehra
Sheetal Kumar Nehrahttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sheetal Kumar Nehra है। मैं एक सॉफ्टवेयर डेवलपर और कंटेंट राइटर हूं , मुझे मीडिया और समाचार सामग्री में 17 वर्षों से अधिक का विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स आदि ) में कंटेंट रइटिंग का अनुभव है । मुझे वेबसाइट डिजाइन करने, वेब एप्लिकेशन विकसित करने और सत्यापित और विश्वसनीय आउटलेट से प्राप्त वर्तमान घटनाओं पर लिखना बेहद पसंद है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News

-Advertisement-