नई दिल्ली, 21 जनवरी (khabarwala24)। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के सूखने पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को अरावली पहाड़ियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को उठाया।
शीर्ष न्यायालय ने सख्त शब्दों में कहा कि झील को और कितना सुखाया जाएगा। अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत से झील पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सीजेआई ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी कि पुरानी गलतियां न दोहराई जाएं।
सुखना झील चंडीगढ़ का एक प्रमुख पर्यटन स्थल और प्राकृतिक खूबसूरती का प्रतीक रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अवैध निर्माण और पर्यावरणीय उपेक्षा के कारण इसका जल स्तर लगातार गिर रहा है। कोर्ट ने कहा कि कुछ राजनीतिक संरक्षण के साथ बिल्डर माफिया काम कर रहे हैं, जिससे झील का विनाश हो रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अनुरोध किया कि पंजाब सरकार द्वारा पहले दिए गए आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट को बताया गया कि साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि सुखना झील के आसपास केवल 100 मीटर क्षेत्र को इको-सेंसिटिव जोन घोषित करने के फैसले पर फिर से विचार किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि झील की बेहतर सुरक्षा के लिए यह जोन कम से कम 1 से 3 किलोमीटर तक होना चाहिए। पंजाब सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि वह इस सुझाव से सैद्धांतिक रूप से सहमत है और इस पर विचार कर रही है।
हालांकि, समय की कमी के कारण बुधवार को मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया है। इस दौरान कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी झीलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा जरूरी है, वरना अपूरणीय नुकसान हो जाएगा।
यह मामला अरावली रेंज के संरक्षण से जुड़ा है, लेकिन सुखना झील का जिक्र करके कोर्ट ने पर्यावरणीय मुद्दों पर अपनी गंभीरता दिखाई है। विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि कोर्ट के हस्तक्षेप से झील को बचाने के ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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