Khabarwala 24 News New Delhi : SC Denies Wife Maintenance सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर पति और पत्नी की आर्थिक स्थिति समान है तो पत्नी को गुजारा भत्ता देने का कोई औचित्य नहीं है। यह मामला तब सामने आया जब एक महिला ने अपने अलग हुए पति से गुजारा भत्ता मांगा, जबकि वह खुद अच्छी खासी तनख्वाह कमा रही थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक तब पहुंचा, जब पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और फिर निचली अदालत ने भी महिला की गुजारा भत्ता की मांग ठुकरा दी थी।
SC ने क्यों ठुकराई याचिका? (SC Denies Wife Maintenance)
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ कहा जब पति-पत्नी दोनों सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और समान रूप से कमा रहे हैं तो पत्नी को गुजारा भत्ता क्यों दिया जाए? कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अगर पत्नी आत्मनिर्भर है और अपनी जरूरतें पूरी करने में सक्षम है, तो वह पति से गुजारा भत्ता मांग नहीं सकती।
क्या थी महिला की दलील? (SC Denies Wife Maintenance)
महिला ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि उसके पति की मासिक आय 1 लाख रुपये है, जबकि वह खुद 60,000 रुपये कमा रही है। इस आधार पर उसने गुजारा भत्ता मांगा। लेकिन पति के वकील शशांक सिंह ने दलील को चुनौती दी और कोर्ट को बताया कि दोनों की स्थिति समान है, इसलिए गुजारा भत्ते की कोई जरूरत नहीं है। इसपर कोर्ट ने दोनों पक्षों से उनकी सैलरी स्लिप जमा करने को कहा और जब पाया कि महिला भी आत्मनिर्भर है तो याचिका खारिज कर दी गई।
फैसले का व्यापक असर (SC Denies Wife Maintenance)
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला उन मामलों के लिए एक नजीर बन सकता है, जहां पति-पत्नी दोनों समान रूप से कमा रहे हैं और कोई भी पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर नहीं है। यह साफ है कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ न्याय ही नहीं किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि गुजारा भत्ता जरूरतमंद को दिया जाना चाहिए। न कि सिर्फ इसलिए कि पति की आमदनी ज्यादा है।


