संसदीय स्थायी समिति ने रक्षा पर एनएसटीएल, विशाखापत्तनम का दौरा किया

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नई दिल्ली/विशाखापत्तनम, 20 जनवरी (khabarwala24)। रक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल), विशाखापत्तनम का दौरा किया। यह दौरा भारतीय नौसेना की पानी के नीचे की क्षमताओं को मजबूत करने वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रयासों की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण था।

समिति ने एनएसटीएल द्वारा विकसित विभिन्न उन्नत उत्पादों का निरीक्षण किया। इनमें टॉरपीडो जैसे एएलडब्ल्यूटी (एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो), वरुणस्त्र और ईएचडब्ल्यूटी (एक्सटेंडेड हेवीवेट टॉरपीडो), माइंस (एमआईजीएम और पीबीजीएम), डेकोय सिस्टम (एसएफडी, टॉर्बस्टर), स्मार्ट (सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो), एचईएयूवी (हाई एंड्योरेंस ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल), स्वार्म (स्वायत्त वाहनों का समूह), पानी के नीचे के सिस्टम, वाहन और अन्य संबंधित पानी के नीचे की हथियार प्रौद्योगिकियां शामिल थीं।

दौरा के दौरान समिति ने सी-कीपिंग और मैन्यूवरिंग बेसिन परीक्षण सुविधा में एक जहाज के स्केल-डाउन मॉडल पर हाइड्रो-डायनामिक परीक्षण का लाइव प्रदर्शन देखा। यह सुविधा जहाजों और पानी के नीचे के प्लेटफॉर्म की गतिशीलता और प्रदर्शन का परीक्षण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले पानी के नीचे के प्लेटफॉर्म, हथियारों और प्रौद्योगिकियों के विकास में एनएसटीएल के अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रयासों की खुलकर सराहना की।

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रक्षा आरएंडडी विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, डीजी (नौसेना सिस्टम और सामग्री) डॉ. आर.वी. हारा प्रसाद और एनएसटीएल के निदेशक डॉ. अब्राहम वर्गीस ने संसद सदस्यों, लोकसभा सचिवालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों सहित प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

एनएसटीएल के निदेशक ने समिति को प्रयोगशाला में चल रही आरएंडडी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी, जिसमें उद्योग और शिक्षा जगत के साथ सहयोग भी शामिल है। उन्होंने लैब के भविष्य के प्रौद्योगिकी रोडमैप पर भी प्रकाश डाला, जिसमें समुद्री डोमेन जागरूकता (मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस) और पानी के नीचे डोमेन जागरूकता (अंडरवॉटर डोमेन अवेयरनेस) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आगे के विकास शामिल हैं। समिति ने इन प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की, क्योंकि ये क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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