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संविधान और जम्मू-कश्मीर से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर जनता से मांगे गए सुझाव

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नई दिल्ली, 10 जनवरी (khabarwala24)। लोकसभा सचिवालय ने संविधान और जम्मू-कश्मीर से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर विचार के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया है। यह समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025; जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 पर विस्तार से चर्चा करेगी।

इस जॉइंट कमेटी की अध्यक्षता सांसद अपराजिता सारंगी कर रही हैं। समिति का मानना है कि इन विधेयकों का असर आम लोगों पर पड़ेगा, इसलिए सिर्फ संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर से भी राय ली जानी चाहिए।

इसी सोच के तहत कमेटी ने आम जनता के साथ-साथ विशेष रूप से गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), विशेषज्ञों, विभिन्न क्षेत्रों के स्टेकहोल्डर्स और संबंधित संस्थानों से लिखित सुझाव और विचार आमंत्रित करने का फैसला किया है।

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जो लोग इन विधेयकों पर अपनी राय, सुझाव या आपत्तियां कमेटी तक पहुंचाना चाहते हैं, वे लिखित रूप में मेमोरेंडम भेज सकते हैं। यह मेमोरेंडम विज्ञापन के प्रकाशित होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भेजना जरूरी है। मेमोरेंडम हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में हो सकता है, लेकिन इसकी दो प्रतियां भेजनी होंगी।

मेमोरेंडम भेजने का पता है—एडिशनल सेक्रेटरी (DR), लोक सभा सचिवालय, कमरा नंबर 018, पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी, नई दिल्ली-110001। किसी भी जानकारी के लिए टेलीफोन नंबर 23035743 या 23034335 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, ईमेल के माध्यम से भी मेमोरेंडम भेजा जा सकता है।

अगर कोई व्यक्ति या संस्था इन विधेयकों का पूरा विवरण पढ़ना चाहती है, तो इनका टेक्स्ट संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। अंग्रेजी और हिंदी दोनों संस्करण वेबसाइट पर मिल जाएंगे। ये विधेयक बिल नंबर 111, 112 और 113 के रूप में सूचीबद्ध हैं, ताकि लोग आसानी से इन्हें पहचान सकें और पढ़कर अपनी राय बना सकें।

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कमेटी को भेजे गए सभी मेमोरेंडम और सुझाव कमेटी के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा होंगे। इन्हें पूरी तरह गोपनीय (कॉन्फिडेंशियल) माना जाएगा और इन्हें कमेटी के विशेषाधिकार भी प्राप्त होंगे। इसका मतलब यह है कि सुझाव देने वालों की बातों को गंभीरता से सुना जाएगा और उनकी गोपनीयता बनाए रखी जाएगी।

जो लोग सिर्फ लिखित सुझाव ही नहीं देना चाहते, बल्कि कमेटी के सामने खुद उपस्थित होकर अपनी बात रखना चाहते हैं, उनसे अनुरोध है कि वे यह बात अपने मेमोरेंडम में साफ तौर पर लिखें। हालांकि किसे कमेटी के सामने पेश होने का अवसर दिया जाएगा, इसका अंतिम फैसला पूरी तरह कमेटी के विवेक पर निर्भर करेगा।

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