लखनऊ, 12 जनवरी (khabarwala24)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज का भ्रमण कर बीटेक प्रथम सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप पाठ्यक्रमों को निरंतर अद्यतन करने और प्रयोगशालाओं में अधिकाधिक छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवेकानंद युवाओं को राष्ट्र की ऊर्जा और भविष्य मानते थे। उनका संदेश- “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको”- आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत उन्नति तभी सार्थक है, जब वह राष्ट्रीय विकास से जुड़ी हो।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप अपने शैक्षणिक एवं तकनीकी कार्यक्रमों को समय-समय पर अपडेट करें, ताकि विद्यार्थी ज्ञानवान होने के साथ नवोन्मेषी, आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बन सकें। उन्होंने स्वच्छता अभियान, डिजिटल पेमेंट, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘विकसित भारत’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी सफलता देश की एकजुट चेतना और साझा संकल्प का परिणाम है। भारत आज ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राज्यपाल ने भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि दीपावली को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता मिलना देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत 8 प्रतिशत से अधिक विकास दर के साथ विश्व की सबसे तेजी से विकसित होने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आईआईटी, आईआईएम और एम्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नई शिक्षा नीति, पीएम श्री स्कूल, चंद्रयान मिशन, उपग्रह प्रक्षेपण, गगनयान और भावी भारतीय स्पेस स्टेशन देश की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं।
आनंदीबेन पटेल ने एकेटीयू को नैक से ‘ए प्लस’ ग्रेड मिलने पर बधाई देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय की आठ वर्षों की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि 378 से अधिक शोधपत्र, 10 से अधिक पेटेंट और 4,500 से अधिक साइटेशन्स विश्वविद्यालय की सशक्त अनुसंधान संस्कृति को दर्शाते हैं। संबद्ध संस्थानों की नैक, एनबीए और एनआईआरएफ में उपलब्धियों की भी उन्होंने सराहना की। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता से जोड़ते हुए स्टार्टअप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन और मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। विश्वविद्यालय की 100 करोड़ रुपए की इनोवेशन निधि, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन परीक्षाओं और उद्योग सहयोग को उन्होंने प्रगतिशील कदम बताया।
उन्होंने सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज की विभिन्न प्रयोगशालाओं—इलेक्ट्रॉनिक्स, फिजिक्स, ऑटोमेशन और गूगल लैब—का निरीक्षण किया और निर्देश दिया कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में कार्य करने का अवसर दिया जाए, ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने बी-टेक छात्रों की हाईटेक कक्षा का भी अवलोकन किया। उन्होंने इनोवेशन हब का भ्रमण कर स्टार्टअप्स के को-वर्किंग स्पेस का जायजा लिया और छात्रों से उनके उत्पादों व नवाचारों की जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। राज्यपाल की उपस्थिति में एकेटीयू और बेंगलुरु स्थित संस्था जेनक्स स्पेस के बीच स्पेस टेक्नोलॉजी पर आधारित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत विश्वविद्यालय में स्पेस क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा शिक्षकों और छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राज्यपाल ने ‘बुंदेलखंड गार्डन’ पुस्तक और बी-टेक छात्रों के लिए कराए गए पाठ्यक्रम की बुकलेट का विमोचन किया तथा विश्वविद्यालय परिसर में रुद्राक्ष का पौधारोपण भी किया। कुलपति प्रो. जेपी पाण्डेय ने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास हो रहे हैं और एकेटीयू को एआई यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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