Khabarwala24 New Delhi : भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ देश का मजबूत स्टैंड दुनिया के सामने रखा। उनके हाथ में थी कलम, सामने था संयुक्त बयान का दस्तावेज, लेकिन उन्होंने इसे साइन करने से साफ मना कर दिया। वजह? इस बयान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र तक नहीं था, जिसमें 26 मासूम लोगों की जान चली गई थी।
पहलगाम हमले का जिक्र क्यों गायब?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राउंड टेबल पर बैठे SCO के नौ अन्य सदस्य देशों के सामने साफ कहा कि यह संयुक्त बयान भारत के आतंकवाद विरोधी रुख को नहीं दर्शाता। सूत्रों के मुताबिक, पहलगाम हमले को बयान से बाहर रखना पाकिस्तान के इशारे पर हुआ, जिसका साथ SCO की मौजूदा अध्यक्षता कर रहा चीन दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि बयान में पहलगाम की जगह बलूचिस्तान का जिक्र किया गया और भारत पर बिना नाम लिए वहां अशांति फैलाने का इल्जाम लगाया गया।
भारत का सख्त संदेश: आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं
राजनाथ सिंह ने इस मौके पर पाकिस्तान और चीन समेत पूरी दुनिया को दो टूक संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है। उन्होंने कहा, “जब तक आतंकवाद का हर रूप स्पष्ट रूप से बयान में शामिल नहीं होगा, भारत ऐसे किसी दस्तावेज का समर्थन नहीं करेगा।” यह कदम न सिर्फ भारत की मजबूत foreign policy को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत global terrorism के खिलाफ कितना गंभीर है।
SCO और भारत की भूमिका
SCO में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान समेत कई देश शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग के लिए काम करता है। लेकिन इस बार भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कोई ढील नहीं बरती जाएगी। राजनाथ सिंह का यह फैसला सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है, जहां लोग उनके इस साहसिक कदम की तारीफ कर रहे हैं।
यह घटना भारत की कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम है। राजनाथ सिंह का यह स्टैंड न केवल SCO बल्कि पूरी दुनिया को भारत की ताकत और इरादे दिखाता है।
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