नई दिल्ली, 3 दिसंबर (khabarwala24)। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) ने पश्चिम बंगाल की केंद्रीय ओबीसी सूची से 35 जातियों को हटाने की सलाह दी है। इन सभी 35 जातियों का संबंध मुस्लिम समुदाय से है। इस कदम ने राजनीति से लेकर सामाजिक न्याय की बहस को नई दिशा दे दी है।
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए कहा कि दशकों से तुष्टीकरण आधारित नीतियों के कारण ओबीसी आरक्षण का दुरुपयोग हुआ और वास्तव में पिछड़ी हिंदू जातियों का हक छीना गया। केंद्र सरकार वोट बैंक राजनीति से पैदा हुई विकृतियों को ठीक कर रही है।
2 दिसंबर को लोकसभा में भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने केंद्रीय ओबीसी सूची को लेकर सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि 2011 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भेजी गई 46 जातियों की सूची में से 37 जातियों को फरवरी 2014 में केंद्र ने अधिसूचित किया था। इनमें से कितनी जातियां अब कोलकाता हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद जांच के दायरे में हैं, जिसमें 2010 के बाद जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों को अवैध ठहराया गया था? क्या एनसीबीसी इन जातियों की समीक्षा कर रहा है और क्या इन्हें केंद्रीय सूची से हटाया जा सकता है? क्या इस प्रक्रिया के लिए कोई समयसीमा तय है?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने इस पर विस्तृत जवाब दिया।
पश्चिम बंगाल ने 46 जातियां केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी। एनसीबीसी ने इनमें से 37 जातियों को 9 नवंबर 2011 को शामिल करने की सलाह दी थी, जिसके आधार पर 17 फरवरी 2014 को गजट अधिसूचना जारी हुई। एनसीबीसी ने 3 जनवरी 2025 को 35 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची से हटाने की सलाह दी।
अमित मालवीय ने इसे ममता बनर्जी सरकार की पक्षपातपूर्ण और वोट बैंक केंद्रित नीतियों का नतीजा बताया। उनके अनुसार, धार्मिक आधार पर समुदायों को ओबीसी श्रेणी में जोड़ना न सिर्फ असंवैधानिक था, बल्कि इससे असली पिछड़े वर्गों का नुकसान हुआ।
Source : IANS
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