सोनापुर-तेपसिया, 12 जनवरी (khabarwala24)। असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (एडीबीयू) नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। यूनिवर्सिटी अपने पहले सैटेलाइट मिशन के लॉन्च की तैयारी कर रही है, जिसे क्षेत्र में अंतरिक्ष अनुसंधान और इनोवेशन की दिशा में एक बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है।
इस सैटेलाइट का नाम ‘लाचित-1’ रखा गया है और इसे फैकल्टी मेंबर्स के मार्गदर्शन में पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के छात्र विकसित कर रहे हैं। इसके साथ ही एडीबीयू नॉर्थईस्ट भारत की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बन जाएगी, जो इतना महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन शुरू करने जा रही है।
इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2022 में प्रोफेसर बिक्रमजीत काकती के नेतृत्व में की गई थी। मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पांच छात्रों की एक कोर टीम गठित की गई है, जो पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रही है। इसके अलावा लगभग 20 छात्रों के अलग-अलग समूह सैटेलाइट डिजाइन, इंजीनियरिंग, डेटा सिस्टम, कम्युनिकेशन और मिशन प्लानिंग जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट छात्रों के लिए अकादमिक ज्ञान को वास्तविक तकनीकी अनुप्रयोग से जोड़ने का एक अनूठा अवसर साबित हो रहा है।
प्रोजेक्ट से जुड़े छात्रों का कहना है कि यह पहल वर्षों की टीम वर्क, तकनीकी सीख और इनोवेशन का परिणाम है। उनके अनुसार, इस मिशन के जरिए उन्हें रियल-वर्ल्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बेहद उपयोगी होगा।
असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी में इंडिजिनस नॉलेज के डायरेक्टर दिनेश बैश्य ने khabarwala24 से बातचीत में इस मिशन को नॉर्थईस्ट भारत के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला मिशन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉर्थईस्ट भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक मिलकर एक सैटेलाइट लॉन्च करेंगे, जो क्षेत्र की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमताओं को नई पहचान देगा।
सैटेलाइट ‘लाचित-1’ का नाम महान अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने मुगल सेना के खिलाफ असम की रक्षा की थी। लाचित बोरफुकन साहस, नेतृत्व और स्वदेशी गौरव के प्रतीक माने जाते हैं। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य इन्हीं मूल्यों को युवा इनोवेटर्स में विकसित करना है, ताकि वे तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहें।
लाचित-1 सैटेलाइट को भूस्खलन, बाढ़, मौसम के पैटर्न और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। यह सैटेलाइट नॉर्थईस्ट भारत में आपदा प्रबंधन, जलवायु अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को सशक्त बनाना है। इस पहल के जरिए युवा दिमागों को अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक प्रयास के साथ असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी नॉर्थईस्ट भारत को राष्ट्रीय अंतरिक्ष इनोवेशन के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है और नई पीढ़ी को आसमान से आगे, सितारों तक पहुंचने का सपना देखने के लिए प्रेरित कर रही है।
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