नई दिल्ली, 17 दिसंबर (khabarwala24)। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भोलेनाथ की उपासना और शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार को सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
पौराणिक ग्रंथों में शिवरात्रि का उल्लेख मिलता है। शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती तथा रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था। अगर आप कोई भी इसका व्रत शुरू करना चाहते हैं, तो वे महाशिवरात्रि से आरंभ करके एक वर्ष तक निरंतर कर सकते हैं।
मान्यता है कि जो जातक मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, मुश्किलें भी कम होती हैं। शिवरात्रि का पूजन मध्य रात्रि में होता है। मध्य रात्रि को निशिता काल के नाम से जाना जाता है।
मासिक शिवरात्रि पर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जातक ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। अब एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर बाबा भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित करें, और उनका अभिषेक करें और बिल्वपत्र, चंदन, अक्षत, फल और फूल चढ़ाएं। भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र के जाप से भी लाभ मिलता है। 11 बार रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करें। शिवलिंग के सम्मुख बैठकर राम-राम जपने से भी भोलेनाथ की कृपा बरसती है।
खास बात है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में उल्लेख मिलता है कि सर्वार्थ सिद्धि का निर्माण तब होता है, जब कोई विशेष नक्षत्र किसी विशेष दिन के साथ आता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने में मदद मिलती है। आप चाहें तो इस दिन नया कार्य भी शुरू कर सकते हैं।
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