‘गद्दी पर बैठे कुछ लोग नहीं चाहते कि वे आगे बढ़ें,’ हर्षा रिछारिया ने बिना नाम लिए साधु-संतों पर साधा निशाना

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भोपाल, 21 जनवरी (khabarwala24)। महाकुंभ के दौरान मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया को छोड़ धर्म की राह अपनाने वाली हर्षा रिछारिया अपने बयानों को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हैं।

उन्होंने वापस ग्लैमर की दुनिया में जाने का फैसला कर लिया है, क्योंकि कुछ गद्दी पर बैठे लोग नहीं चाहते हैं कि वे आगे बढ़ें। हर्षा ने समाचार एजेंसी khabarwala24 से बातचीत करते हुए कहा कि वह किसी का नाम नहीं लेंगी, लेकिन उन्हें आज भी बहुत परेशान किया जा रहा है।

साध्वी से वापस ग्लैमर की दुनिया में जाने के फैसले पर हर्षा रिछारिया ने कहा, “मैंने इस मार्ग पर चलने के लिए अपने सभी काम छोड़ दिए थे। अंत में मुझे एहसास हुआ कि मैं कोई साधु, साध्वी या संन्यासी नहीं हूं जो अपने सभी कामों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से लोगों के दान और भेंट पर निर्भर रह सके। मैंने समझा कि धर्म का प्रचार तभी उचित है जब आपके पास स्वयं पर्याप्त संसाधन हों, इसलिए मैंने अपने काम को धीरे-धीरे इस तरह से प्रबंधित करने का निर्णय लिया जिससे मैं अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपना जीवन भी जी सकूं।”

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उन्होंने आगे कहा कि अगर राशन भी खरीदना है तो पैसे की जरूरत पड़ती है। कौन कितने दिन ही उधार देगा? यहां मेरे फैसलों पर और मेरे चरित्र पर उंगली उठाई जा रही है और किसी तरह का कोई सपोर्ट भी नहीं है।

हर्षा रिछारिया ने कहा, “मैं किसी व्यक्ति का नाम नहीं लूंगी, क्योंकि कुछ लोग लगातार इस तरह की हरकतें करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा मानना ​​है कि अगर मुझे किसी व्यक्ति से कोई समस्या है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूंगी। अगर मुझे किसी से असहजता महसूस होती है, तो यह समझ में आता, लेकिन किसी के जीवन में बार-बार बाधाएं खड़ी करना, लगातार परेशानियां पैदा करना और पहले से ही यह तय कर लेना कि चाहे कुछ भी हो जाए, उसे जीवन में आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा, यह बहुत गलत सोच है। कुछ साधु-संत ऐसे करने की भी कोशिश कर रहे हैं।”

हर्षा रिछारिया ने सनातन धर्म को त्यागने के सवाल पर कहा, “सबसे पहले तो यह कहना गलत होगा कि कुंभ के दौरान मैंने सनातन धर्म को ‘अपना लिया,’ क्योंकि कोई भी व्यक्ति किसी धर्म को तब तक पूरी तरह से नहीं अपना सकता, जब तक वह उसका हिस्सा न हो। मैं खुद को इस धर्म में जन्म लेने के लिए भाग्यशाली मानती हूं, तो मैं कौन होती हूं इसे ‘अपना लेने वाली’? सनातन धर्म के लिए हमने जो काम शुरू किया था, धार्मिक कार्यक्रमों, सोशल मीडिया और युवाओं एवं बेटियों से जुड़ने के माध्यम से, मैंने उस पर विराम लगाने का फैसला किया था, न कि धर्म को छोड़ने का।

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उन्होंने कहा कि “महाकुंभ के बाद मैंने युवाओं को धर्म से जोड़ने, धर्म का ज्ञान कराने और खासकर युवा महिलाओं और बच्चियों के लिए कार्य करने का सोचा था, लेकिन मेरे हर काम को रोक दिया जा रहा था। गद्दी पर बैठे कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि मैं आगे बढूं और समाज के लिए कुछ करूं।”

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