नई दिल्ली, 20 जनवरी (khabarwala24)। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा-टीएमसी आमने सामने हैं। दोनों दलों के नेताओं की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे भी किए जा रहे हैं।
टीएमसी नेता सागरिका घोष ने कहा कि हम किसी दूसरी पार्टी या नेता पर कमेंट नहीं करना चाहते। हम सिर्फ अपनी पार्टी और अपने नेता के बारे में बात करेंगे। जिस तरह से ममता बनर्जी सरकार ने पिछले 15 वर्षों में लोकप्रिय और असरदार प्रशासन और गवर्नेंस दिया है, हमें विश्वास है कि लोग ममता बनर्जी के साथ हैं और भविष्य में भी उनके साथ खड़े रहेंगे।
बंगाल में एसआईआर का जिक्र करते हुए टीएमसी नेता ने कहा कि जैसा कि हमने पहले भी कहा है, हम एसआईआर के खिलाफ नहीं हैं और हम चाहते हैं कि वोटर लिस्ट सही हो। अगर फर्जी वोटर हैं, तो उन्हें हटाया जाए, हालांकि हम कह रहे हैं कि जिस तरह से एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, वह गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस एसआईआर प्रक्रिया में कई कमियां बताई हैं। इससे बुजुर्गों, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों और बेसहारा लोगों को गंभीर दिक्कतें हो रही हैं। बीएलओ खुद अपनी जान ले रहे हैं। इस तरह से जल्दबाजी करके एसआईआर नहीं किया जा सकता। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।
टीएमसी नेता ने कहा कि एसआईआर सिटिजन फ्रेंडली होना चाहिए। चुनाव आयोग का काम तो वोट देने के अधिकार को बचाना है, लेकिन आप वोट देने के अधिकार को छीन रहे हैं।
सागरिका घोष ने एसआईआर को सॉफ्टवेयर इंटेंसिव रिगिंग बताते हुए दावा किया कि तथाकथित एसआईआर बंगाल के लोगों को परेशान करने के लिए बनाया गया एक मैकेनिज्म है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि तथाकथित ‘लॉजिकल गड़बड़ियों’ की लिस्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे पारदर्शिता, उचित प्रक्रिया और लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांतों की पुष्टि हो।
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