आइजोल, 7 मार्च (khabarwala24)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को आइजोल में मिजोरम विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उनसे 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया।
विश्वविद्यालय परिसर की प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मिजोरम विश्वविद्यालय सबसे सुंदर परिसरों में से एक है और यह इस बात का प्रतीक है कि जब शिक्षा शांति और उद्देश्य पर आधारित हो तो क्या हासिल किया जा सकता है।
पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर में बदलावों पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र को भारत के विकास के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू की गई बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन समेत बेहतर कनेक्टिविटी, साथ ही उड़ान और पीएम-डिवाइन जैसी पहल विकास को गति दे रही हैं और इस क्षेत्र के लोगों को नए अवसरों से जोड़ रही हैं।
2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नौकरी की तलाश से आगे बढ़कर अवसर सृजन पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने पर्यटन, बांस-आधारित उद्योग, जैविक कृषि, हस्तशिल्प और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में पूर्वोत्तर की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।
उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशीले पदार्थों की समस्या पर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नशीले पदार्थों से दूर रहने और अनुशासित व उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों को प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी और उनसे प्रौद्योगिकी के गुलाम बनने के बजाय उसके स्वामी बनने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने मिजोरम की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और उच्च साक्षरता दर का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य की मजबूत आदिवासी परंपराओं और पर्यावरण चेतना की प्रशंसा की। सौर ऊर्जा पर काफी हद तक संचालित होने के लिए मिजोरम विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए उन्होंने युवाओं से पर्यावरण स्थिरता को बढ़ावा देने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
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