मुंबई, 1 फरवरी (khabarwala24)। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने केंद्रीय बजट को जनता की आकांक्षाओं की कसौटी पर विफल बताया।
उन्होंने तर्क दिया कि महाराष्ट्र राष्ट्रीय खजाने में सबसे बड़ा योगदानकर्ता होने के बावजूद, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे या वित्तीय आवंटन के मामले में एक बार फिर राज्य की उपेक्षा की गई है।
उन्होंने कहा कि बजट रोजगार सृजन या मुद्रास्फीति नियंत्रण को लेकर जनता में कोई विश्वास पैदा करने में विफल रहा है।
उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार के खजाने में सबसे बड़ा योगदानकर्ता महाराष्ट्र पर तो ध्यान भी नहीं दिया गया है। चाहे जीडीपी हो, जीएसटी हो या आयकर, हम सबसे बड़े योगदानकर्ता हैं और आनुपातिक रूप से सबसे अधिक उपेक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि विकास वास्तव में राष्ट्रीय और स्वाभाविक होता है, असफल जीआईएफटी योजना के विपरीत। लेकिन फिर, चुनावों से परे सोचना भारत के लिए सचमुच एक उपहार होगा।
शिवसेना के यूबीटी सांसद संजय राउत ने दावा किया कि बजट में मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए कोई योजना नहीं है।
उन्होंने वेतनभोगी वर्ग के लिए महत्वपूर्ण आयकर राहत की कमी पर प्रकाश डाला, खासकर तब जब करदाता मानक कटौती या कर स्लैब में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे।
उन्होंने टिप्पणी की कि भाषण के दौरान शेयर बाजार की नकारात्मक प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना में तत्काल कोई ठोस आधार नहीं है।
सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने वित्त मंत्री के पहनावे (तमिलनाडु की कांजीवरम रेशमी साड़ी) को चुनाव वाले राज्यों पर सरकार के ध्यान केंद्रित करने का संकेत बताते हुए सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरीं।
उन्होंने सुझाव दिया कि बजट देश की आर्थिक स्थिति से ज्यादा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए राजनीतिक दिखावे का जरिया था।
उन्होंने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में बजट को एक बड़ी निराशा बताया जो उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
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