भोपाल, 5 मार्च (khabarwala24)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को अपने जन्मदिन पर पौधारोपण किया और साथ ही दो बड़े ऐलान भी किए। उन्होंने बताया कि गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए विदिशा संसदीय क्षेत्र में ‘मामा कोचिंग’ और इलाज के लिए ‘मामा चलित अस्पताल’ शुरू किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने जन्मदिन पर परिवार के साथ पौधरोपण किया और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पेड़ केवल लकड़ी का ढांचा नहीं, करोड़ों जीवों का घर और हमारी ऑक्सीजन की फैक्ट्री हैं। धरती का तापमान कम करना है, तो हर हाल में पेड़ लगाना है।
उन्होंने विदिशा संसदीय क्षेत्र के गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए बड़ी सौगात देते हुए कहा कि मामा कोचिंग क्लासेस शुरू की जाएंगी। पैसे की कमी किसी बच्चे के भविष्य की बाधा नहीं बनेगी। विदिशा, रायसेन और भैरुंदा में हम बेहतरीन व मुफ्त कोचिंग शुरू कर रहे हैं ताकि गरीब का बच्चा भी अफसर बन सके। साथ ही माता-पिता की स्मृति में विदिशा संसदीय क्षेत्र के मेधावी बच्चों के लिए प्रेम-सुंदर प्रतिभा सम्मान का शुभारंभ किया जाएगा। टॉपर्स को सम्मान राशि दी जाएगी। दिव्यांगजनों के लिए बेहतर सुविधाएं मिले, इसका केंद्रीय कृषि मंत्री ने वादा किया।
उन्होंने कहा कि अब हाथों से साइकिल चलाने का कष्ट नहीं होगा। बैटरी वाली मोटराइज्ड साइकिल से हमारे दिव्यांग भाई-बहन न केवल चलेंगे बल्कि अपना रोजगार भी कर सकेंगे। विदिशा संसदीय क्षेत्र के दूरस्थ इलाकों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके, इसके लिए उन्होंने मामा चलित अस्पताल शुरू करने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि विदिशा की आठों विधानसभाओं के गांव-गांव और मजरे-टोलों तक अब खुद चलकर आएगा ‘मामा चलित अस्पताल’। आधुनिक जांच और डॉक्टरों की टीम के साथ, अब द्वार पर ही हर गरीब का निशुल्क इलाज होगा।
मेडिकल मोबाइल वैन की स्थिति का जिक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने अपने संसदीय क्षेत्र की सभी आठों विधानसभाओं में आठ मोबाइल क्लीनिक प्रारंभ करने का संकल्प लिया है। इन मोबाइल क्लीनिकों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध रहेंगी। प्रारंभिक जांचों – जैसे ईसीजी, रक्त परीक्षण वहां आसानी से हो सकेगा। इनमें डॉक्टर, कंपाउंडर और आवश्यक चिकित्सा स्टाफ उपस्थित रहेगा।
दूरस्थ इलाके में हम तय करेंगे कि यह जहां खड़ी हो जाए, तो वहां 5 से 10 गांव के लोग आ जाएं और अपना चेकअप करा लें। छोटी-मोटी बीमारियों में तत्काल इलाज हो जाए, दवा दे दी जाए और रेफर करके कहीं और दिखाना जरूरी है, तो वे रेफर करने का काम करें।
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