नई दिल्ली, 7 मार्च (khabarwala24)। भारत के विशिष्ट युद्ध नायकों में से एक हवलदार और वीर चक्र विजेता के.जी. जॉर्ज का आज सुबह 5:15 बजे 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। केजी जॉर्ज को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान साहस, कर्तव्यनिष्ठा, सैन्य व्यावसायिकता और बलिदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। केजी जार्ज के निधन पर भारतीय सेना ने दुख जताते हुए कहा है कि यह देश के लिए अपूर्णीय क्षति है।
हवलदार के.जी. जॉर्ज केरल के कोट्टायम जिले के शांतिपुरम डाकघर, नेदुगादप्पल्ली स्थित कोझिकुन्नथ हाउस के निवासी थे। परिवार में उनकी पुत्री मागी हैं।
पैराशूट ब्रिगेड सिग्नल कंपनी में लांस हवलदार (लाइनमैन फील्ड) के रूप में कार्यरत हवलदार जॉर्ज ने 6 से 10 सितंबर 1965 के बीच वाघा सेक्टर में भीषण युद्ध अभियानों के दौरान असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया था। इस अवधि के दौरान, क्षेत्र लगातार दुश्मन की तोपखाने की गोलाबारी और हवाई हमले की चपेट में था, जिससे ब्रिगेड मुख्यालय और अग्रिम बटालियनों के बीच महत्वपूर्ण संचार लाइनें बार-बार बाधित हो रही थीं।
भयंकर खतरे के बावजूद, लांस हवलदार जॉर्ज ने असाधारण दृढ़ संकल्प के साथ अपने सेक्शन का नेतृत्व करते हुए बाधित संचार संपर्कों को बहाल किया। 8/9 सितंबर 1965 की महत्वपूर्ण रात को शत्रु के हमले के दौरान, उन्होंने ब्रिगेड मुख्यालय से अग्रिम बटालियनों तक संचार लाइन स्थापित करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली, जिससे युद्ध के एक महत्वपूर्ण चरण के दौरान निर्बाध कमान और नियंत्रण सुनिश्चित हुआ। भीषण गोलीबारी के बीच उनके अटूट साहस, नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा ने युद्धक्षेत्र में परिचालन समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
लांस हवलदार की असाधारण वीरता और उच्च कोटि की कर्तव्यनिष्ठा को मान्यता देते हुए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जो भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कारों में से एक है। कोर ऑफ सिग्नल्स से यह पुरस्कार पाने वाले वे एकमात्र व्यक्ति थे। भारतीय सेना और सिग्नल कोर हवलदार जॉर्ज को एक ऐसे सैनिक के रूप में याद करते हैं, जिनकी युद्ध के दौरान दिखाई गई बहादुरी ने सेवा की सर्वोत्तम परंपराओं का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन और विरासत सैनिकों की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
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