शाहजहांपुर, 21 फरवरी (khabarwala24)। कभी ‘सरफरोशी की तमन्ना’ के साथ आजादी की जंग में कूदने वाले रणबांकुरों की धरती शाहजहांपुर अब विकास, शिक्षा और औद्योगिक प्रगति की नई पहचान बनकर उभर रही है। लंबे समय तक उपेक्षा झेलने वाला यह जिला बीते वर्षों में मेडिकल कॉलेज, प्रस्तावित विश्वविद्यालय, औद्योगिक निवेश और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के जरिए परिवर्तन की नई इबारत लिख रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम के महानायक राम प्रसाद बिस्मिल की कर्मभूमि रहा यह जिला आज शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा चुका है। बिस्मिल के नाम पर स्थापित मेडिकल कॉलेज न केवल स्थानीय मरीजों को आधुनिक उपचार दे रहा है, बल्कि अन्य जिलों और राज्यों के छात्र भी यहां से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं।
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, अत्याधुनिक लैब और 100 बेड के अस्पताल की सुविधा से मरीजों को अब बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। उच्च शिक्षा के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव हुआ है। जिले का प्राचीन और विख्यात स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज अब विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे स्थानीय छात्र-छात्राओं को बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
एमए उत्तीर्ण छात्रा निशा कहती हैं, ‘अब हमें बरेली या लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। यहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और अभिभावक भी सुरक्षित महसूस करेंगे।’ राजनीति विज्ञान के छात्र उपेंद्र सिंह के अनुसार विश्वविद्यालय बनने से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता आसान हुआ है। आर्थिक मोर्चे पर जरी-जरदोजी ने जिले को नई पहचान दी है।
राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत इस पारंपरिक हस्तशिल्प को नया जीवन मिला है। कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी यह कला अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रही है।
कारीगर मोहम्मद यासीन खान बताते हैं, पहले 4-5 कारीगर थे, आज 50 लोग काम कर रहे हैं। दुबई और सऊदी अरब से ऑर्डर मिल रहे हैं। आमदनी सात-आठ गुना बढ़ गई है।”
उनके मुताबिक, अब कारीगर 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक कमा रहे हैं। औद्योगिक विकास ने भी रफ्तार पकड़ी है। अल्ट्राटेक सीमेंट की फैक्ट्री समेत अन्य इकाइयों में हजारों युवाओं को रोजगार मिला है। औद्योगिक गलियारे का विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं। गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ाव ने जिले को प्रदेश के प्रमुख शहरों से सीधे जोड़ दिया है। ग्रामीण अंचलों में भी सरकारी योजनाओं का असर दिख रहा है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत सुनीता पांडे जैसी महिलाओं को स्वरोजगार के साधन मिले हैं। सुनीता कहती हैं, ‘सरकारी किट मिलने से मैं आत्मनिर्भर बनी हूं और परिवार का सहारा भी।’ वहीं ‘ड्रोन दीदी’ पहल के जरिए महिलाएं खेती में आधुनिक तकनीक अपनाकर आय बढ़ा रही हैं।
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, जिले में कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है और जनसुनवाई के माध्यम से त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रशासन 24 घंटे एक्शन मोड में रहता है, जिससे निवेश और विकास का माहौल मजबूत हुआ है। कभी उपेक्षा और निराशा की कहानियां सुनाने वाला शाहजहांपुर अब शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और हस्तशिल्प के समन्वित विकास के साथ नई पहचान गढ़ रहा है। क्रांति की इस धरती पर अब विकास का स्वर्णिम अध्याय लिखा जा रहा है।
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