चेन्नई, 17 फरवरी (khabarwala24)। तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने मंगलवार को फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित विधानसभा में राज्य का 2026-27 का अंतरिम बजट पेश किया, जिसमें विधानसभा चुनावों से पहले कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा, खेल विकास और सांस्कृतिक अवसंरचना पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
मंत्री ने घोषणा की कि हाल ही में आए आर्थिक संकट के दौरान पड़ोसी देश श्रीलंका को 197 करोड़ रुपए की राहत सामग्री भेजी गई, जो मानवीय सहायता के प्रति तमिलनाडु की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
प्रमुख आवंटनों में से खेल विकास के लिए 718 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जबकि ग्रामीण विकास विभाग के लिए 28,687 करोड़ रुपए अलग रखे गए हैं।
विशेष कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग को 17,088 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इसमें से 10 करोड़ रुपए विश्वभर में प्रवासी समुदायों के बीच तमिल भाषा को बढ़ावा देने और सिखाने के लिए आवंटित किए गए हैं।
सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता मिलती रही, जिसके तहत विधवाओं, बेसहारा महिलाओं और बुजुर्गों को लाभ पहुंचाने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए आरएस 5,463 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
स्कूली शिक्षा के लिए 48,534 करोड़ रुपए और उच्च शिक्षा के लिए 8,505 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
मंत्री ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए 1,471 करोड़ रुपए की घोषणा भी की, जिसमें उन्होंने नियुक्तियों में चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने और सार्वजनिक रोजगार में उनके लिए पदोन्नति के अवसरों को सुनिश्चित करने के सरकार के निर्णय पर प्रकाश डाला।
थेन्नारासु ने कहा कि मुख्यमंत्री की नाश्ता योजना से सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति और सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने तंजावुर में एक भव्य चोल संग्रहालय, गंगईकोंडाचोलपुरम में एक संग्रहालय, इरोड जिले में नोय्याल संग्रहालय, रामनाथपुरम जिले में नावाई संग्रहालय और चेन्नई के एग्मोर सरकारी संग्रहालय में नई कांस्य और सिंधु घाटी सभ्यता दीर्घाओं का प्रस्ताव रखा है।
तिरुवनमलाई में एक तमिल सांस्कृतिक संग्रहालय भी स्थापित किया जाएगा। इन परियोजनाओं के लिए कुल 285 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में उद्घाटन किए गए विश्वस्तरीय कीझाडी और पोरुनाई संग्रहालयों को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।
मंत्री ने कलाइग्नार मगलीर उरिमाई थिट्टम को एक अग्रणी योजना बताते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के अवैतनिक घरेलू श्रम को मान्यता देती है और इसके तहत उन्हें प्रतिमाह 1,000 रुपए का भत्ता दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसकी सफलता ने अन्य राज्यों को प्रेरित किया है।
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