सौर ऊर्जा में उत्तर प्रदेश बना मॉडल स्टेट, 10.94 लाख आवेदन और 1,227 मेगावाट की क्षमता

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लखनऊ, 31 जनवरी (khabarwala24)। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल स्टेट के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार की प्रमुख पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश ने न सिर्फ रिकॉर्ड आवेदन दर्ज किए हैं, बल्कि स्थापित सौर क्षमता के मामले में भी नई ऊंचाइयों को छुआ है। राष्ट्रीय पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में अब तक प्राप्त 58.36 लाख आवेदनों में से 10.94 लाख से अधिक आवेदन अकेले उत्तर प्रदेश से आए हैं।

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार की सक्रिय नीति, यूपीनेडा और बिजली वितरण कंपनियों के समन्वित प्रयासों के चलते उत्तर प्रदेश में अब तक 3,57,879 रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही प्रदेश की कुल स्थापित सौर क्षमता बढ़कर 1,227.05 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो इसे सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करती है। योजना के तहत उपभोक्ताओं को अब तक 2,440.62 करोड़ रुपए की केंद्रीय सब्सिडी और लगभग 600 करोड़ रुपए की राज्य सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि सब्सिडी आधारित यह मॉडल आम नागरिकों के लिए सौर ऊर्जा को सुलभ और किफायती बना रहा है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। पीएम सूर्य घर योजना का सीधा लाभ उपभोक्ताओं को बिजली बिल में मिल रहा है। रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 60 से 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। इससे उपभोक्ताओं को औसतन 1,500 रुपए से 3,000 रुपए प्रति महीने तक की बचत हो रही है। इसके साथ ही नेट मीटरिंग की सुविधा के माध्यम से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में समायोजित किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है।

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उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में स्थापित सोलर सिस्टम से प्रतिदिन 50 लाख यूनिट से अधिक ग्रीन बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे बिजली वितरण कंपनियों पर पीक डिमांड का दबाव कम हुआ है और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था अधिक स्थिर व विश्वसनीय बनी है। यह पहल उत्तर प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रही है। पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो रही है। पीएम सूर्य घर योजना के चलते प्रदेश में प्रतिवर्ष 13 से 15 लाख टन CO2 उत्सर्जन में कमी आ रही है।

अधिकारी ने कहा कि कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता घटने से वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे भारत के नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य को समर्थन मिल रहा है। प्रदेश सरकार योजना को भविष्य में यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस (यूईआई) आधारित डिजिटल ऊर्जा ढांचे से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत सौर उत्पादन, स्मार्ट मीटरिंग, नेट मीटरिंग, कार्बन डेटा और भुगतान प्रणालियों को बैंकिंग व वित्तीय सिस्टम से एकीकृत किया जाएगा। इससे ईवी चार्जिंग, ग्रीन फाइनेंसिंग, कार्बन क्रेडिट ट्रैकिंग और ऊर्जा आधारित वित्तीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईयू-इंडिया एफटीए और सीबीएएम (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) के परिप्रेक्ष्य में यह पहल उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी सुदृढ़ करेगी।

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— khabarwala24

विकेटी/डीसीएच

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