नई दिल्ली, 10 फरवरी (khabarwala24)। सरकार ने पूर्व सैनिकों के केंद्रीय सिविल सर्विसेज और पदों में पुनः रोजगार से संबंधित संशोधन नियम 2026 को अधिसूचित किया है। इसका मुख्य मकसद यह साफ करना है कि अब मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) के अधिकारी भी पूर्व सैनिक पुनः रोजगार के दायरे में आते हैं।
पहले यह साफ नहीं था कि एमएनएस के कमीशंड अधिकारियों को अन्य पूर्व सैनिकों की तरह ही सरकारी नौकरियों में विशेष लाभ मिलेंगे या नहीं। यह नया नियम इस अस्पष्टता को खत्म करता है और एमएनएस के कर्मियों को सिविल सेवाओं में पुनः रोजगार का अधिकार देता है।
संशोधन के तहत 2(सी)(i)(i) को बदलकर यह स्पष्ट किया गया है कि जो भी व्यक्ति किसी भी रैंक में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना या एमएनएस में सेवा दे चुका है, चाहे वह लड़ाकू हो या गैर-लड़ाकू, वह पूर्व सैनिक के रूप में मान्यता प्राप्त करेगा। यानी अब एमएनएस के कर्मी भी अन्य सेना के पूर्व सैनिकों के समान अधिकार और लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
इस नियम से एमएनएस कर्मियों के लिए पुनर्वास और दूसरा करियर खोजने के मौके मजबूत होंगे। अब उन्हें केंद्रीय सरकारी पदों में आरक्षण मिलेगा। ग्रुप सी में 10 प्रतिशत और ग्रुप डी में 20 प्रतिशत। साथ ही उनकी उम्र की सीमा में भी छूट दी गई है। इसमें उनकी सैन्य सेवा के सालों को उनकी वास्तविक उम्र में से घटाकर तीन साल और जोड़े जाएंगे, जिससे वे अधिक उम्र तक सिविल नौकरी के लिए पात्र बन सकेंगे।
सिर्फ यही नहीं, इस संशोधन के बाद एमएनएस कर्मियों को नौकरी में प्राथमिकता भी मिलेगी। यानी यूपीएससी और एसएससी जैसी संस्थाओं में भर्ती के दौरान उन्हें अन्य पूर्व सैनिकों के बराबर माना जाएगा। इससे न सिर्फ उनके करियर के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि उनका सम्मान और पहचान भी सुनिश्चित होगी।
सरकार का यह कदम पूर्व सैनिकों के पुनः रोजगार और उनके सामाजिक व आर्थिक पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। अब एमएनएस अधिकारी भी अपने अनुभव और प्रशिक्षण का फायदा उठाकर सिविल सेवा में योगदान दे सकेंगे। यह नियम 9 फरवरी से लागू हो गया है और इसके जरिए पूर्व सैनिकों की सेवा का सम्मान बढ़ेगा।
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