नई दिल्ली, 16 मार्च (khabarwala24)। रसोई गैस सिलेंडर की कथित कमी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरते हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
जेपी नड्डा ने आरोप लगाया था कि गैस सिलेंडरों की कमी कांग्रेस नेताओं द्वारा सिलेंडरों की ‘होर्डिंग’ (भंडारण) किए जाने की वजह से हो रही है। उनके इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे बेबुनियाद बताते हुए सरकार पर स्थिति संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने जेपी नड्डा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आरोप पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने कहा कि आखिर कांग्रेस के नेता गैस सिलेंडर की होर्डिंग कैसे कर सकते हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस हमेशा से जनता से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है और रसोई गैस की किल्लत का मुद्दा भी उसी का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में लोगों को गैस सिलेंडर पाने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगानी पड़ रही हैं और यह बात किसी से छिपी नहीं है। उनके मुताबिक विपक्ष का दायित्व है कि वह जनता की समस्याओं को सामने लाए और कांग्रेस आगे भी इन मुद्दों को उठाती रहेगी।
कांग्रेस से राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन ने भी नड्डा के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अधिक बेतुका बयान शायद ही कोई हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में कोई सिलेंडरों की होर्डिंग कर रहा है तो सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को छापेमारी कर यह पता लगाना चाहिए कि सिलेंडरों का अवैध भंडारण कौन कर रहा है और उन्हें जब्त कर जनता के बीच वितरित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह के आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी गैस की बढ़ती कीमतों और कथित कमी को लेकर सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज अखबारों की सुर्खियों में यही खबरें हैं कि खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं और कई लोग मजबूरी में फिर से चूल्हा का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी चूल्हा जलाने की अनुमति मिल गई है, जबकि पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के कारण इस पर रोक थी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश के कई राज्यों में भाजपा की डबल इंजन सरकार है, लेकिन इसके बावजूद रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं थी।
उनके अनुसार, जब पहले से संकेत मिल रहे थे कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है और इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है, तब सरकार को पहले से इंतजाम करने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह वैश्विक तनाव या संभावित युद्ध कितने समय तक चलेगा, लेकिन यह सभी को पता है कि एलपीजी की कमी के कारण आम लोगों को सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
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