राज्यसभा में सी. सदानंदन ने खुद से हुई हिंसा का किया जिक्र, सवाल भी उठाए

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
-Advertisement-

नई दिल्ली, 2 फरवरी (khabarwala24)। राज्यसभा में सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया। उच्च सदन में यह प्रस्ताव सी. सदानंदन मास्टर ने रखा। इस दौरान उन्होंने एक अत्यंत भावुक और गंभीर वक्तव्य देते हुए अपने जीवन पर हुए राजनीतिक हमले का उल्लेख किया और लोकतंत्र, सहिष्णुता तथा राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर सदन का ध्यान आकर्षित किया।

धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि वे कभी एक पूरी तरह सक्षम व्यक्ति थे, लेकिन आज उन्हें कृत्रिम पैरों (आर्टिफिशियल लिंब्स) के सहारे जीवन जीना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण नहीं, बल्कि 31 वर्ष पहले हुए एक राजनीतिक हमले का परिणाम है।

सी. सदानंदन मास्टर स्कूल शिक्षक से राजनीतिज्ञ बने हैं, और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हैं। वह भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं और भाजपा की केरल इकाई में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने सदन में बताया कि 31 वर्ष पहले उस समय सीपीएम नेताओं की सलाह पर सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने उन पर जानलेवा हमला किया।

- Advertisement -

उन्होंने सदन को बताया कि यह घटना तब हुई, जब वे अपने अंकल के घर से लौट रहे थे, जहां उनकी बहन की शादी को लेकर बातचीत हुई थी। बस से उतरते ही एक बाजार में पहले से घात लगाए बैठे संगठित अपराधियों ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया, सड़क पर गिराया और बेरहमी से उनके दोनों पैर पर घातक हमला किया।

सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि हमलावर राजनीतिक नारे लगा रहे थे और इस हिंसा को राजनीतिक जवाब के रूप में अंजाम दिया गया। उन्होंने सदन में यह सवाल उठाया कि जो लोग आज लोकतंत्र, सहिष्णुता और मानवता की बातें करते हैं, उनका अतीत हिंसा से जुड़ा रहा है। इस दौरान केरल से वामपंथी सांसदों ने इस विरोध व टीका टिप्पणी की।

सी. सदानंदन मास्टर ने अपने आर्टिफिशियल पैर सीट के ऊपर रखे थे। लेफ्ट सांसद ने नियम का हवाला देते हुए आर्टिफिशियल पैर वहां से हटाने की मांग की।

- Advertisement -

वहीं, सी. सदानंदन मास्टर ने कहा, “मैं देश के सामने, जनता के सामने और इस सदन के सदस्यों के सामने यह दिखाना चाहता हूं कि असली लोकतंत्र क्या होता है। केवल शब्दों में लोकतंत्र की बात करना आसान है, लेकिन हिंसा पर आधारित राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक हिंसा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र का अर्थ असहमति को स्वीकार करना और विचारों से मुकाबला करना है, न कि हिंसा के माध्यम से विरोधियों को कुचलना। अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने सदन में नियमों के तहत अपनी बात रखने की अनुमति देने का उल्लेख किया और कहा कि वे राष्ट्र के नाम शपथ लेकर यह बात कह रहे हैं कि राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र को कमजोर करती है और इससे समाज को गहरी चोट पहुंचती है।

भाषण के अंत में उन्होंने सभापति का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे नियमों और संसदीय मर्यादाओं का सम्मान करते हुए अपनी बात सदन के सामने रख रहे हैं।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

- Advertisement -
spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News

-Advertisement-