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पश्चिम बंगाल : टीएमसी ने मतदाता सूची पारदर्शिता पर उठाए सवाल, एसआईआर के बाद दैनिक सप्लीमेंट्री रोल जारी करने की मांग

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कोलकाता, 6 मार्च (khabarwala24)। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीएमसी) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन को लेकर पारदर्शिता और प्रक्रिया के पालन पर सवाल उठाए हैं।

एक पत्र के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को अवगत कराया गया है कि 28 फरवरी 2026 को जारी मेमो नंबर 2496-होम (इलेक्ट्रॉनिक) के अनुसार राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची (फाइनल इलेक्टोरल रोल 2026) प्रकाशित की गई थी, लेकिन इसमें कुछ कमियां बरकरार हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद भी दैनिक आधार पर सप्लीमेंट्री इलेक्टोरल रोल जारी किए जाने चाहिए, ताकि न्यायिक निर्णयों के आधार पर योग्य मतदाताओं को शामिल किया जा सके। पत्र में मांग की गई है कि इस संबंध में स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाए कि 28 फरवरी 2026 की अंतिम सूची के अलावा दैनिक सप्लीमेंट्री रोल में शामिल सभी मतदाताओं को 2026 विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची का हिस्सा माना जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया था कि यदि सत्यापन प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी नहीं होती, तो अंतिम सूची प्रकाशित की जा सकती है और उसके बाद सप्लीमेंट्री सूचियां जारी की जाएंगी, जिनमें शामिल मतदाताओं को 28 फरवरी की अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा। इससे कोई योग्य मतदाता वंचित न रहे।

पत्र में दूसरा प्रमुख मुद्दा दैनिक सप्लीमेंट्री रोल के प्रकाशन के नियमों का पालन न करने का है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा एडज्यूडिकेशन (निर्णय) के परिणामों को शामिल करने वाली सप्लीमेंट्री सूचियां रोजाना प्रकाशित की जाएं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और मतदाताओं और राजनीतिक दलों को दावों-आपत्तियों की स्थिति की जानकारी मिलती रहे। इन सूचियों में शामिल/हटाए गए मतदाताओं से जुड़े दावों, आपत्तियों और गड़बड़ियों का निपटारा सक्षम न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए।

हालांकि, ज्यूडिशियल ऑफिसर्स (जे.ओ.) के लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया गया है, जहां सत्यापन विवरण और एडज्यूडिकेशन रिकॉर्ड अपलोड किए जा रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक जांच के लिए कोई समेकित रिपोर्ट, सार्वजनिक प्रकटीकरण या सुलभ प्रकाशन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ऐसी पारदर्शिता की कमी से मतदाताओं में संदेह पैदा हो रहा है।

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एसआईआर प्रक्रिया में लगभग 60 लाख से अधिक मामलों को ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ चिह्नित किया गया है, जबकि अंतिम सूची में कुल मतदाता लगभग 6.44 करोड़ हैं। इससे पहले ड्राफ्ट रोल में 7.08 करोड़ मतदाता थे, और प्रक्रिया में 61 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं।

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