नई दिल्ली, 20 फरवरी (khabarwala24)। भारतीय संस्कृति में योग के महत्व पर जोर दिया गया है और धीरे-धीरे लोगों का आकर्षण इसकी ओर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में भुजंगीकरण एक ऐसा प्राणायाम है, जो सरल होने के साथ-साथ शरीर पर गहरा असर डालता है।
यह बैठकर किया जाने वाला आसन है, जो पीठ को मजबूत और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। साथ ही, यह तनाव कम करने और भूख बढ़ाने में मददगार है।
आयुष मंत्रालय ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला है। मंत्रालय के अनुसार, यह कमर दर्द, पीठ की समस्याओं, श्वसन संबंधी परेशानियों और कफ दोष कम करने के लिए खास तौर पर अनुशंसित है। यह छाती को खोलता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, ऑक्सीजन ग्रहण बेहतर करता है और तनाव-थकान दूर कर मन को शांत रखता है।
आयुर्वेद के अनुसार, यह पित्त दोष को शांत करता है और शरीर में ठंडक पहुंचाकर अत्यधिक गर्मी से राहत दिलाता है।
इसे करना बेहद आसान है। इसको करने के लिए सबसे पहले सुखासन या किसी भी आरामदायक आसन में बैठ जाएं। कमर और गर्दन सीधी रखें। हाथों को घुटनों पर ज्ञान या चिन मुद्रा में रखें और आंखें कोमलता से बंद करें। मुंह को खोलें और धीरे-धीरे हवा को पेट में सांस की तरह खींचें, जिससे पेट फूलेगा। सांस अंदर भरने के बाद मुंह बंद करें, जालंधर बंध (ठोड़ी को छाती से लगाना) लगाएं और सांस को अपनी क्षमता अनुसार रोकें और आखिर में, जालंधर बंध खोलें और दोनों नासिका छिद्रों से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को शुरू में 5 बार दोहराएं, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10 बार तक किया जा सकता है।।
नियमित अभ्यास से भुजंगासन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है, लेकिन गर्भवती महिलाएं, गंभीर पीठ समस्या वाले लोग, या हाल ही में सर्जरी वाले लोग डॉक्टर से सलाह लें या फिर किसी योग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।


