तिरुवनंतपुरम, 20 फरवरी (khabarwala24)। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में केरल कैबिनेट ने शुक्रवार को राज्य की इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी। इसमें अगले पांच सालों में केरल को भारत में एक लीडिंग नॉलेज और इनोवेशन हब के तौर पर स्थापित करने के लिए एक बड़ा रोडमैप बताया गया है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस पॉलिसी के सेंटर में भारत के कुल आईटी एक्सपोर्ट शेयर का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल करना और आईटी सेक्टर और उससे जुड़ी इंडस्ट्रीज में कम से कम पांच लाख नई नौकरियां पैदा करना है।
सरकार का मकसद आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी को भी काफी बढ़ाना है, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और उभरते शहरी और सेमी-अर्बन सेंटर्स में डीसेंट्रलाइज्ड ग्रोथ के जरिए मौजूदा कैपेसिटी को तीन गुना करने पर फोकस है, साथ ही इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से चलने वाले नॉलेज इंडस्ट्री इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।
पॉलिसी में स्पेस, एयरोस्पेस, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और जीनोमिक्स जैसे उभरते और हाई-टेक्नोलॉजी सेक्टर्स पर खास जोर दिया गया है, जिसका मकसद केरल को इन एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डोमेन में भारत की इकोनॉमिक एक्टिविटी का 5-10 प्रतिशत हिस्सा हासिल करने में मदद करना है।
राज्य में स्टार्टअप्स की संख्या को काफी बढ़ाने का प्रस्ताव है, सरकार अपने बड़े इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप पुश के हिस्से के तौर पर 20,000 स्टार्टअप्स बनाने और उन्हें समर्थन करने का टारगेट रख रही है।
यूनिवर्सल डिजिटल एक्सेस को पॉलिसी का एक और अहम हिस्सा माना गया है, जिसमें पूरे राज्य में फाइबर-ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाकर 100 प्रतिशत घरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पक्का करने का प्लान है।
गवर्नेंस को आसान बनाने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए, एक यूनिफाइड एंटरप्राइज आर्किटेक्चर बनाया जाएगा ताकि सभी नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक्सेस करने के लिए एक सिंगल यूजर इंटरफेस दिया जा सके, जिसे एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके प्रेडिक्टिव और प्रिस्क्रिप्टिव गवर्नेंस मॉडल से सपोर्ट मिलेगा।
इसके अलावा, ज्यादा ई-गवर्नेंस एप्लिकेशन को क्लाउड-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर माइग्रेट किया जाएगा, जिसे जिम्मेदार डेटा इस्तेमाल, डेटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी प्रोटेक्शन पक्का करने के लिए एक बड़े फ्रेमवर्क से सपोर्ट मिलेगा।
पॉलिसी में डेटा-ड्रिवन सॉल्यूशन प्रोवाइडर और कंपनियों को सक्षम बनाने के मकसद से राज्य-नियंत्रित डेटा एक्सचेंज बनाने का भी प्रस्ताव है, साथ ही सरकार द्वारा फंडेड सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट के लिए ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी को अपनाना और कम्युनिटी के नेतृत्व वाली ओपन हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इनोवेशन पहल को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
रिसर्च, टैलेंट डेवलपमेंट और इनोवेशन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, डेटा एनालिटिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे खास उभरते एरिया में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे, साथ ही सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और यूजर डेटा की सुरक्षा के लिए एक बड़ा साइबर सिक्योरिटी कानून लाने की भी योजना बना रही है।
सेक्टर में तेजी लाने के लिए, सरकार नए आईटी पार्क बनाने के लिए लैंड पूलिंग, उभरते टेक्नोलॉजी क्लस्टर में प्लग-एंड-प्ले वर्कस्पेस बनाना, डेटा सेंटर में निवेश को आकर्षित करने के लिए इंसेंटिव, आसान लेबर नियम और आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए एक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाने जैसे कदम उठाएगी।
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